जांच दल की रिपोर्ट पर एक्शन, जिला प्रशासन के दूसरे अधिकारियों पर कार्रवाई न होने से उठ रहे सवाल
एक और धान खरीदी घोटाले में कार्रवाई तो हुई,लेकिन नाकाफी। मामले में,जिला आपूर्ति नियंत्रक अधिकारी कमलेश टांडेकर को सस्पेंड कर दिया गया है,जबकि उस अधिकारी का पता नहीं क्यों बख्श दिया गया,जो श्री टांडेकर के कामकाज की मॉनीटरिंग करता है और हर फाइल में हस्ताक्षर भी उन्हीं महाशय के होते हैं। ऐसा नहीं है कि टांडेकर की जिम्मेदारी नहीं
है,लेकिन इनसे ज्यादा जिम्मेदार अफसरों को भी सबक सिखाना जरूरी था। हालाकि, सूत्रों का कहना है कि अभी कार्रवाई की शुरुआत हुई है, अगले कुछ दिनों में और भी नाम आएंगे। जानकारों का कहना है कि ऐसा संभव ही नहीं है कि ये गोलमाल हकेवल एक अधिकारी ने किया हो।
अधिकारी क्यों नहीं देख पाए गड़बड़ी-
जानकारी के मुताबिक जबलपुर में धान खरीदी को लेकर बड़ा फर्जीवाड़ा हुआ। यहां पर बिना अनुमति गोदामों में धान का भंडारण किया गया। अतिरिक्त खरीदी केंद्र बनाने में देरी भी हुई, लिहाजा खाद्य विभाग के प्रमुख सचिव ने जबलपुर के जिला आपूर्ति नियंत्रक कमलेश टांडेकर को निलंबित कर दिया। इस गड़बड़ी की जांच करने के लिए भोपाल से 10 सदस्यीय दल जिले के गोदामों में जाकर जांच भी कर रहा है। इस दौरान उन्हें कई प्रकार की अनियमितताएं भी मिली थीं। आदेश के अनुसार, जिले में 121 केंद्र बनने थे। उसकी जगह अभी तक 85 केंद्र स्थापित किए गए हैं। बाकी के 36 केंद्रों की स्थापना के लिए महिला स्व-सहायता समूहों के प्रस्ताव 21 दिसंबर को भेजा गया। केंद्र नहीं बनने से किसानों को अपनी उपज के विक्रय में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। महिला स्व-सहायता समूह के लिए तय किए गए गोदामों का सत्यापन भी ठीक से नहीं किया गया।
तय क्या था, हुआ क्या-
आदेश के अनुसार, तय नीति का पालन किए बगैर भारी मात्रा में धान का भंडारण कर लिया गया। इस पर भी जिला आपूर्ति नियंत्रक ने कोई कार्रवाई नहीं की। यही नहीं इस संबंध में राज्य स्तर पर कोई जानकारी नहीं दी गई। यह भी कहा गया कि उपार्जन नीति के प्रावधानों के अनुसार सेवा सहकारी समितियों को दो-दो खरीदी केंद्र संचालन करने के प्रावधान के विपरीत जिले की 27 सहकारी समितियों को केवल 1-1 खरीदी केंद्र का कार्य दिया गया। इससे जिले में तय संख्या में खरीदी केंद्र नहीं बन पाए।

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