परेशान होते रहे कर्मचारी, घंटों जाम से जूझता रहा ट्रेफिक, अफसरों ने साधी चुप्पी
स्ट्रांग रूम को एमएलबी स्कूल से जेएनकेवीवी ले जाने से सिर्फ स्थान ही परिवर्तन हुआ लेकिन कर्मचारियों की मुसीबतें कम नहीं हुईं, बल्कि और बढ़ गईं। एमएलबी में कर्मचारियों के पास सहूलियत थी कि वे मदद के लिये किसी को बुला सकते थे, लेकिन, नए स्ट्रांग रूम में ये मुमकिन नहीं है। स्ट्रांग रूम को शहर से बाहर ले जाने का आइडिया आज उस वक्त फ्लॉप हो गया, जब मतदान दलों का सामग्री वितरण कार्यक्रम शुरू हुआ। सुबह से ही सड़क पर जाम लगा रहा, जिससे लोगों को खासी परेशानी हुई। सामग्री लेने जाने वाले और सामग्री लेकर आने वाले घण्टों जाम में ही फंसे रहे। अधिकारियों तक ये बात पहुँचाई गयी पर वे अनसुना कर गए। सवाल ये है कि जब पता था कि भीड़ बढ़ेगी तो उसे मैनेज करने प्लान क्यों नहीं बनाया गया।
-फेल हो गया प्रयोग
आज की बदतर हालत देखकर ये तय हो गया कि स्ट्रॉन्ग रूम को बदलने का प्रयोग उल्टा मुसीबत बन गया। जैमर लगे होने के कारण लोग एक दूसरे से सम्पर्क करने को तरसते रहे। एमएलबी में बाहर सड़क पर पहुँचना आसान था, लेकिन, नया स्ट्रांग रूम को इतनी आसानी से पार करना मुश्किल है। अधिकारियों का कहना है पहले ही इन समस्याओं को बैठकों में उठाया गया था पर ध्यान नहीं दिया गया। कर्मचारियों की मजबूरी है कि वे अधिकारियों से खुलकर कुछ कह नहीं सकते क्योंकि चुनाव के बाद उन्हीं की मातहती में काम करना है।
विधानसभा का चुनाव कराने गठित मतदान दलों की मतदान सामग्री प्राप्त करने के बाद जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय परिसर से मतदान केंद्रों के लिये रवानगी शुरू हो गई है। मतदान दल, मतदान केंद्र तक 251 बड़ी और 250 छोटी बसों से पहुँचेंगे। मतदान दलों को मतदान केंद्र तक पहुँचाने दो ट्रेक्टर और एक मोटरबोट का इस्तेमाल भी होगा। मतदान दलों के परिवहन के लिये 501 रुट तय किये गए हैं तथा दस प्रतिशत रिजर्व सहित कुल 551 बसों की व्यवस्था की गई है।





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