वोटर को इमोशनल कर रहे नेताजी के शॉर्ट्स वीडियो - दा त्रिकाल

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Wednesday, November 8, 2023

वोटर को इमोशनल कर रहे नेताजी के शॉर्ट्स वीडियो


नेता को अभिनेता बना रही रील्स

विधानसभा चुनाव के मैदान में जिन प्रत्याशियों की इमेज ज्यादा ही डैमेज है, उसे संवारने के लिए रील्स और शॉर्ट्स का इस्तेमाल बहुत सोच-समझकर किया जा रहा है। इन छोटे वीडियो में नेताजी या तो पैर पड़ रहे हैं या बच्चों का दुलार रहे हैं। जबलपुर की आठों विधानसभा में प्रत्येक प्रत्याशी इस फंडे पर अमल कर रहा है।

एक समय था, जब चुनाव प्रचार जनसंपर्क, बैनर-पोस्टर से चल जाता था, लेकिन अब स्थिति काफी बदल गई है। अब जनसंपर्क के साथ ही सोशल मीडिया के जरिए लोगों के बीच नायक बनने का प्रयास नेताजी कर रहे हैं। राजनीतिक दलों के अधिकांश नेताओं ने छवि चमकाने का काम एजेंसियों को सौंप दखा है। एजेंसी के कर्मचारी इमोशनल गानों की रील्स के साथ ही पोस्टर आदि बनाकर मतदाताओं के बीच वायरल कर रहे हैं। नेताजी का उदारवादी चेहरा दिखाना उनकी प्राथमिकता में है। प्रचार के दौरान नेताजी का बुजुर्गों का पैर पड़ना, बच्चों को दुलारना आदि पहले से ही तय रहता है। नेताजी के साथ चल रहा वीडियोग्राफर तुरंत इस पल को क्लिक करता है और उसमें गाने समेत कई चीजों को एड कर नायक की रील वायरल कर दी जाती है।

एजेंसिया हर जगह सक्रिय-
शहर में एक-दो नहीं, बल्कि कई ऐसी डिजिटल मीडिया एजेंसी हैं, जो स्थानीय के साथ ही बाहरी उम्मीदवारों की सोशल मीडिया के जरिए छवि चमकाने का काम अपने हाथ में ले रखा है। एजेंसी के लिए पार्टियां अहम नहींं हैं, उम्मीदवार अहम हैं। एक ही एजेंसी एक क्षेत्र के कांग्रेस तो दूसरे इलाके के भाजपा उम्मीदवार के लिए काम कर रही है। निर्दलीय भी साथ हैं।

एजेंसी के वीडियोग्राफर-फोटोग्राफर सुबह से ही उम्मीदवार के साथ हो जाते हैं। उनकी पूरी गतिविधि को कैद करते हैं। एजेंसी से जुड़े लोगों के मुताबिक, लोगों के बीच इमोशनल पोस्ट ज्यादा असर करती है, इसलिए प्रचार के दौरान ऐसे फोटो-वीडियो का विशेष ध्यान रखा जाता है। किसी के घर जाकर नाश्ता-भोजन करते हुए, बुजुर्ग का आशीर्वाद लेते हुए, बच्चों को दुलारते हुए प्रत्याशी दिखते हैं, तो तुरंत फोटो-वीडियो क्लिक हो जाता है। यह भी कह सकते हैं कि यह सारी गतिविधि रील के लिए फिक्स होती है। इमोशनल गाने के साथ रील बनती है और अगले कुछ मिनट में वायरल हो जाती है। दिनभर में 15-20 नई रील एजेंसी जारी करती है।

ऐसे टारगेट होते हैं मतदाता-
एक प्रत्याशी के सोशल मीडिया का काम देख रहे अभिनव के मुताबिक, उम्मीदवार की गतिविधियां उनके मतदाता तक पहुंचाने फेसबुक, जीओ लोकेशन काम आती है। उम्मीदवार जिस विधानसभा का है, उस क्षेत्र के सक्रिय लोगों की जीओ लोकेशन के आधार पर बंच तैयार होता है, फिर उन्हें पोस्ट भेजी जाती है। इन लोगों तक पोस्ट पहुंचाने के लिए फेसबुक को भुगतान किया जाता है। चुनाव प्रचार के मुकाबले यह राशि कम होती है।

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