सांसदों के निलंबन का सिलसिला जारी, दो दिन में 92 सांसद सस्पेंड - दा त्रिकाल

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Tuesday, December 19, 2023

सांसदों के निलंबन का सिलसिला जारी, दो दिन में 92 सांसद सस्पेंड


लोकसभा से अब तक 95, राज्यसभा से 46 सांसद निलंबित

संसद की सुरक्षा में चूक के मसले पर हंगामे को लेकर सांसदों का निलंबन जारी है। दो दिन में 92 सांसदों को सस्पेंड किए जाने के बाद मंगलवार को एक बार फिर लोकसभा से 49 और सांसदों को पूरे सत्र के लिए निलंबित किया गया। इनमें कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी, शशि थरूर, नेशनल कॉन्फ्रेंस के फारूक अब्दुल्ला से लेकर एनसीपी की सुप्रिया सुले और सपा की डिंपल यादव तक शामिल हैं।

एक दिन पहले ही संसद में अमर्यादित आचरण के लिए सांसदों का निलंबन किया गया था। कुल 92 सांसदों के निलंबन की कार्रवाई पहले ही की जा चुकी थी।अगर आज के आंकड़ों को जोड़ लिया जाए तो लोकसभा से अब तक 95 सांसदों को निलंबित किया गया है। वहीं, राज्यसभा से 46 सांसदों को सस्पेंड किया गया। संसद के दोनों सदनों से अब तक कुल 141 सांसदों को निलंबित किया जा चुका है।

किन सांसदों का हुआ निलंबन?
वी वेंथिलिंगम, गुरजीत सिंह औजला, सुप्रिया सुले, सप्तगिरि उलाका, अदूर प्रकाश, अब्दुल समद समदानी, मनीष तिवारी, प्रद्युत बार्दोलोई, गिरधारी यादव, गीता कोड़ा, फ्रांसिस्सको सारदिन्हा, जगत रक्षम, एसआर पार्तिविवन, फारुख अब्दुला, ज्योत्सना महंत, ए गणेश मूर्ति, माला राय, पी. वेलूसामी, ए चंदकुमार, शशि थरूर, कार्ति चिंदबंरम, सुदीप बंदोपाध्याय, डिंपल यादव, हसनैन मसूदी, दानिश अली, खदीदुल रहमान, राजीव रंजन सिंह, डीएनवी सेंथिल कुमार, संतोष कुमार, दुआल चंद्र गोस्वामी, रवनीत बिट्टू, दिनेश यादव, के. सुधाकरन, मोहम्मद सादिक, एमके विष्णु प्रसाद, पीपी मोहम्मद फैजल, साजदा अहमद, जसवीर सिंह गिल, महाबली सिंह, अमोल कोल्हे, सुशील कुमार रिंकू, सुनील कुमार सिंह, एचटी हसन, एम धनुष कुमार, प्रतिभा सिंह, थोल थिरुमावलन, चंद्रेश्वर प्रसाद, आलोक कुमार सुमन और दिलेश्वर कामत शामिल हैं।

राजीव सरकार में हुआ था 63 का निलंबन-
1989 में लोकसभा के 63 सांसदों को एक सप्ताह के लिए निलंबित किया गया। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या की जांच के लिए गठित ठक्कर आयोग की रिपोर्ट पर सांसदों में रोष था। माफी मांगने पर निलंबन वापस हो गया। 2010 में महिला आरक्षण विधेयक पर अमर्यादित व्यवहार के लिए राज्यसभा के सात सांसदों को निलंबित किया गया।

2012 में 8 सांसद निलंबित-
सांसदों के निलंबन का अप्रत्याशित मामला था। तत्कालीन यूपीए सरकार के कार्यकाल में तेलंगाना के मुद्दे पर सदन की कार्यवाही बाधित करने के लिए आठ कांग्रेस सदस्यों को निलंबित किया गया। सभी आठ सांसद तेलंगाना क्षेत्र के थे और अलग तेलंगाना राज्य की मांग कर रहे थे। तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने साल 2013 में 12 सांसदों को पांच दिन के लिए सस्पेंड कर दिया था। ये सांसद आंध्र प्रदेश से अलग कर तेलंगाना बनाए जाने का विरोध कर रहे थे और इसे लेकर ही संसद में जमकर हंगामा हुआ था। 13 फरवरी 2014 को तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने आंध्र प्रदेश के 18 सांसदों को शेष सत्र के लिए निलंबित किया था। इन सांसदों को तेलंगाना के मुद्दे पर सदन में अव्यवस्था फैलाने के लिए निलंबित किया गया था। सांसदों को लगातार जानबूझकर सदन बाधित करने के लिए निलंबित किया गया। लोकसभा के सांसद पोस्टर लेकर लगातार नारे लगा रहे थे। 25 सांसदों को 2015 में निलंबित किया गया। तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने 2019 में 45 सांसदों को संसद की कार्यवाही बाधित करने के लिए निलंबित किया था। महाजन ने पहले 24 एआईएडीएमके सांसदों को निलंबित किया। इसमें एआईएडीएमके, टीडीपी और वाईएसआर कांग्रेस के सांसद शामिल थे। राज्यसभा में दो कृषि विधेयक पारित किए जाने के दौरान अमर्यादित व्यवहार के लिए 21 सितंबर 2020 को आठ सांसदों को निलंबित कर दिया गया था। 2021 में संसद के मानसून सत्र के दौरान अमर्यादित और आक्रामक व्यवहार के लिए सदस्यों को शेष शीतकालीन सत्र के लिए निलंबित किया गया।

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