बिजली महकमे में अंधेर की इन्तेहां, एक अधिकारी ने हैक किया पूरा सिस्टम, सरकार भी लाचार नज़र आ रही, 4 हजार करोड़ की योजना की अब तक जांच नहीं
मध्यप्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी की साख को कमजोर करने वाले करोड़ों के सौभाग्य योजना घोटाले में छोटे अफसरों की तो कुर्बानी ले ली गयी, लेकिन हैरतअंगेज तरीके से बड़े साब यानी महाप्रबंधक से पूछताछ भी नहीं की गई है। सवाल उठ रहे हैं क्या ये मुमकिन है कि इतना बड़ा घपला हो गया और एमडी सान को भनक न लगी हो। शक्ति भवन के गलियारों में इन दिनों हर जबान पर यही चर्चा है कि आखिर डेढ़ दशक से एक ही कुर्सी पर डटे श्री दुग्गड़ को कंपनी सर पर क्यों बिठाए हुए है। पूरा मामला आईने की तरफ साफ है,लेकिन दोषियों पर एक्शन लेने में घनघोर पक्षपात किया गया।
-क्या है सौभाग्य घोटाला
पूरे प्रदेश के हर घर को अंधेरे से आजादी दिलाकर उजाले से भरने की ख्वाहिश के साथ सौभाग्य योजना का आगाज हुआ था। जिसमें पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के हिस्से में करीब 20 जिले आए,जहां योजना जमीन पर उतरनी थी। वक्त पर काम भी शुरु हुआ और नवम्बर 2019 को काम पूरा भी हो गया। इसके कुछ महीने बाद ही खुलासा हुआ कि योजना का कामकाज केवल कागजों में पूरा हुआ है,असल में नहीं। जांच-पड़ताल शुरु हुई, विधानसभा में हंगामा हुआ, कुछ अफसरों को संस्पेंशन थमाया गया। तब से अब तक जांच का सिलसिला जारी है और ताजा घटनाक्रम में अफसरों पर एक्शन लिया गया है। इस जाँच के बाद महाप्रबंधक अजय दुग्गड़ जैसे अधिकारियों पर कारवाई न होना किसी के गले नहीं उतर रहा है, जबकि सौभाग्य योजना के घोटाले के अलावा अन्य अनियमितताओं के गम्भीर आरोप हैं।
उल्लेखनीय है कि इन 20 जिलों में कंपनी को 42 करोड़ की चपत लगी और अब तक 30 करोड़ की वसूली भी हो चुकी है।
-सब फिक्स है क्या!
इधर पूर्व क्षेत्र कंपनी के अधिकारियों का कहना है जांच में सब कुछ फिक्स था। जैसा तय किया गया था, वैसा ही किया गया। 12 अफसरों को जो सज़ा दी गयी है, वो सज़ा भी बहुत सोच-समझकर दी गयी है और इतने बड़े घोटाले को आसानी से निबटा दिया गया, जबकि असल दोषी अभी भी मौज कर रहे हैं। जिन बड़े अफसरों के इशारे पर छोटे अफसरों ने ठेकेदारों ने अधूरे काम को पूर्ण बताया, वे अफसर अभी भी जांच के घेरे में नहीं आ सके हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव की सरकार आने के बाद लग रहा था कि कंपनी की छवि से खिलवाड़ करने वाले अफसर नपेंगे पर अभी तक निराशा ही हाथ लगी है।
-घपले और भी हैं
गरीबों के घरों तक बिजली पहुंचाने वाली सौभाग्य योजना को बदनाम करने वाले अफसरों के नाम और भी घपले लिखे हुए हैं। केंद्र सरकार की 4 हजार करोड़ की आरडीएसएस योजना में भी जांच का न होना दुर्भाग्यपूर्ण है। इस योजना के तार भी महाप्रबंधक श्री दुग्गड़ के दफ्तर से सीधे जुड़े हुए हैं। ये एक अधिकारी पूरे सिस्टम पर भारी साबित हो रहे हैं।

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