हटाया, बसाया और खूब कमाया - दा त्रिकाल

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Wednesday, January 17, 2024

हटाया, बसाया और खूब कमाया

जबलपुर के लेमा गार्डन आवास आवंटन में नियम कायदे ताक पर, अपात्रों को लाभ

मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित गोहलपुर इलाके के लेमागार्डन में पीएम आवास योजना के तहत बने मकान फिर चर्चाओं के केन्द्र में हैं। वजह आवंटन में फिर वही भ्रष्टाचार का खेल। पहले भी अवैध कब्जेधारियों को इसलिए हटाया था कि नियमों के खिलाफ आवंटन किया गया। लेकिन पिछले साल हुई दोबारा आवंटन प्रक्रिया से भी पारदर्शिता गायब रही। अपात्रों की विस्थापित पर्चियां बनने से लेकर चाबी सौंपने तक के काम में लेन-देन का फॉर्मूला अपनाया गया। नतीजा वही, जो पहले था। हटाने वाले हटाकर चले गए, बसाने वालों ने किसी को भी बसाया और मनमर्जी का कमाया। अब पैसा चुकाने के बाद भी छत मयस्सर नहीं होने पर पात्र लोगों की नाराजगी भी जायज है। कुछ नाराज लोगों ने इस खुले भ्रष्टाचार की शिकायत से निगमायुक्त को रूबरू कराया है। जिन्हे जांच और उचित कार्रवाई का आश्वासन भी मिला है।

निगमायुक्त तक पहुंचे शिकायत पत्र के अनुसार पात्र गरीबों और विस्थापितों के लिए लेमा गार्डन में बने आवासों के दोबारा आवंटन में सिर्फ फर्जीवाड़े का सहारा लिया गया। भानतलैया, कठौंदा यहां तक कि दमोह के नकली विस्थापितों की फर्जी पर्चियां बनाई गईं। पहले मोटी रकम लेकर फर्जी तरीके से विस्थापित पर्चियां बनाई गई। फिर इसके बाद और पैसे ऐंठकर आवास पर कब्जा दिया गया। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि अगर विस्थापित पर्चियों के बनाने में लगने वाले दस्तावेजों की जांच की जाए तो सच उजागर हो जाएगा।

सब गोलमाल है...
लेमा गार्डन आवासों का फर्जीवाड़ा यहीं खत्म नहीं होता, आवंटन प्रक्रिया में शामिल निगम के कर्मचारियों ने भी नियम-कायदों की खूब धज्जियां उड़ाईं। अपनों को लाभ पहुंचाने के चक्कर में निगम कर्मियों ने पात्रों से जमकर बदला लिया। महज कुछ रकम लेकर आवास पर कब्जा दिया और आड़ के लिए बैंक से फाइसेंस का सहारा भी लिया। शिकायतकर्ता के मुताबिक मृतक के नाम पर भी एक आवास का आवंटन कर दिया गया है। खाली पड़े आवासों में निगम कर्मियों का कब्जा जमाए हुए हैं। जो शान से किराए पर चल रहे हैं।

आवास प्रभारी की भूमिका संदिग्ध-
शिकायतकर्ता मंगन सिद्दीकी और अन्य ने आवास प्रभारी सुनील दुबे पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए कहा कि लेमा गार्डन में इतने बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार चल रहा है। समय-समय पर इसकी सूचना आवास प्रभारी को दी गई। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। जिससे आवास प्रभारी की भी मिलीभगत होने की गुंजाईश से इंकार नहीं किया जा सकता। शिकायतकर्ताओं ने बताया कि हाल ही ही एक और पीड़ित सामने आया है। जिसने 8 माह पहले आवास के लिए पूरा पैसा जमा कर दिया। लेकिन उसको आवास का आवंटन नहीं किया गया। जबकि उसके नाम के आवास को मोटी रकम लेकर किसी और को आवंटित कर दिया गया।

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