जबलपुर: जरूरतमंदों के बैंक खाते बनते थे सॉफ्ट टारगेट - दा त्रिकाल

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Wednesday, January 24, 2024

जबलपुर: जरूरतमंदों के बैंक खाते बनते थे सॉफ्ट टारगेट


बैंक अकाउंट के गैरकानूनी इस्तेमाल के मामले में पुलिस को मिले नए इनपुट, झारखंड के अलावा देश के कई राज्यों में फैला है नेटवर्क

बैंक अकाउंट को लाखों के गैरकानूनी लेन-देन के लिए इस्तेमाल करने वालों पर जबलपुर पुलिस ने शिकंजा कस लिया है। ताज़ा खुलासा हुआ है कि खातों के सौदागर गरीबों के बैंक खातों को आसानी से शिकार बनाते थे। पुलिस को ये भी पता चला है कि झारखंड के अलावा भी देश के कई शहरों से गैंग ऑपरेट की जा रही है। पुलिस की एक टीम जल्दी झारखंड रवाना होगी।

ऑनलाइन ठगी के लिए बैंक खातों के इस्तेमाल करने वाले इस मामले में जबलपुर पुलिस ने गैंग के 7 सदस्यों को गिरफ्तार किया है। पूछताछ में पता चला कि गैंग को झारखंड के जामताड़ा से दो लोग ऑपरेट कर रहे हैं। आरोपी मध्यप्रदेश समेत कई राज्यों के करीब 150 से ज्यादा खातों को खरीदकर फर्जी ऑनलाइन ट्रांजेक्शन कर चुके हैं। खातों की कीमत दो हजार से लेकर 10 हजार रुपए तक है। पकड़े गयर आरोपी इफ्तेखार और मोहम्मद आसिफ ने ही पीयूष खटीक से 10 हजार रुपए में बैंक अकाउंट खरीदे थे। इसके बाद इन्हें झारखंड के ठगों को 16 हजार रुपए में बेचा।

-ये आरोपी गिरफ्तार
  • इफ्तेखार अहमद (43) पिता मरहूम मुमताज अहमद, निवासी हनुमातताल।
  • मो. आसिफ (43) पिता नासिर अली, निवासी गोहलपुर।
  • अजीत बेन (29) पिता रामदयाल बेन, निवासी रांझी।
  • हेमंत पिल्लै उर्फ सनी (27) पिता आशीर्वदान पिल्लै, निवासी त्रिमूर्ति नगर, गोहलपुर।
  • अरविंद यादव (32) पिता स्व. शंकरलाल यादव, निवासी गोसलपुर।
  • आशीष कोरी (24) पिता लखनलाल कोरी, निवासी तिलवारा।
  • पीयूष खटीक (21) पिता धनराज खटीक, निवासी त्रिपुरी चौक गढ़ा।
वहीं अकबर अहमद और सलीम, निवासी जामताड़ा झारखंड फरार हैं।

-ऐसे जुड़ी कड़ी से कड़ी

इस गोरखधंधे की खबर जब अग्निबाण में प्रकाशित हुई तब पुलिस ने ऐसी सभी
शिकायतों को गम्भीरता से लिया, जो फर्जी ट्रांजेक्शन की ओर इशारा कर रही थी। मामला साइबर पुलिस के पास पहुंचा। सबसे पहले पुलिस ने आशीष कोरी (24) को हिरासत में लिया। पूछताछ में आशीष ने बताया कि त्रिपुरी चौकी में रहने वाले पीयूष खटीक (21) को उसने खाता 5 हजार रुपए में बेचा था। उसकी निशानदेही पर पीयूष को पकड़ा। एक के बाद एक आरोपियों की चेन लंबी होती गई। तय हो गया कि ये अंतरराज्यीय गिरोह है, जो बैंक खातों को खरीदने-बेचने का काम करता है।

-आपस में खातों का सौदा
पीयूष खटीक ने बताया कि उसने आसिफ व इफ्तेखार को 10 हजार रुपए में खाते बेचे थे। पुलिस ने हनुमानताल और गोहलपुर के रहने वाले आसिफ व इफ्तेखार को हिरासत में लेकर पूछताछ की। इसके बाद अंतरराज्यीय फर्जी बैंक खातों के ऑनलाइन गैंग का खुलासा हुआ। इफ्तेखार ने बताया कि उसने ये खाते झारखंड में जामताड़ा के रहने वाले अकबर अहमद और उसके दोस्त सलीम को 16 हजार रुपए में बेचे हैं। डेढ़ साल में जबलपुर और आसपास के कई जिलों के 150 से अधिक खाते अकबर अहमद व सलीम को बेचे हैं। इस तरह आरोपी एक के बाद एक लगातार खातों को दूसरे को बेच दिया करते थे। इफ्तेखार और मोहम्मद आसिफ ने बताया कि किसी भी व्यक्ति को ब्लैकमेल करने के बाद जैसे ही खातों में रुपए आते थे, तो ये लोग उन खातों से रुपए निकालकर छोड़ दिया करते थे। इनके तार राजस्थान, गुजरात के अलावा कई राज्यों में फैले हैं। ये लोग युवा,गरीब और जरूरतमंदों को निशाना बनाते हुए 4 से 6 हजार रुपए में बैंक खाते खरीदा करते थे।

-ओटीपी कैसे हथिया लेते थे
खाता खुलने के बाद बैंक पासबुक, चेक बुक, बैंक डिटेल और एटीएम ले लिया करते थे। इसके बदले में उन्हें पांच से 10 हजार रुपए दिया करते थे। आरोपियों को पता था कि बैंक खाते खुलवाने से पहले ओटीपी के लिए मोबाइल की जरूरत पड़ेगी। लिहाजा, आरोपी नई सिम भी खाताधारकों से खरीदवा लेते थे। प्राइवेट बैंक में आसानी से खाताधारक खाता खुलवा लेता था। प्राइवेट बैंक के खाताधारक को 2 हजार से 6 हजार और सरकारी बैंक में खाता खुलवाने के लिए 10 हजार रुपए तक देते थे। इसके बाद यही खाते जबलपुर में रहने वाले गैंग के सदस्य मास्टरमाइंड को 16 हजार प्रति खाते के हिसाब से बेच देते थे।

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