प्रदेश की 29 में 11 सीटों का ज्यादा फोकस, 20 प्रतिशत से कम वोटों से हारने वाली सीटों पर पैनी नजर, छिंदवाड़ा का किला भी बचाने की जद्दोजहद
कांग्रेस विधानसभा चुनाव के गम से उबर कर एक बार फिर से लोकसभा चुनाव के लिए कमर कस रही है। कांग्रेस ने प्रदेश का मुखिया बदल दिया है और नई कवायद का आगाज भी हो चुका है। विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद कांग्रेस अब लोकसभा चुनाव की तैयारियों में जुट गई है। कांग्रेस का दावा है कि वो फरवरी महीने में ही लोकसभा चुनाव के लिए प्रदेश की सभी 29 सीटों पर प्रत्याशी तय कर देगी। लेकिन ऐसी 11 सीटों पर ज्यादा फोकस कर रही है जहां पर बीजेपी की जीत का मार्जिन 20 प्रतिशत से कम वोट रहा है।
कांग्रेस ने कमलनाथ को प्रदेशाध्यक्ष की कुर्सी से उतारकर उनकी जगह जीतू पटवारी को बिठाकर बहुत अच्छा कदम उठाया। इसके बाद पटवारी ने भी ताबड़तोड़ बैठकें की और नई सोच पेश करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। लेकिन प्रदेश कांग्रेस पर अभी भी वही कद्दावर शिकंजा कसे हुये है। सारे बड़े नेताओं के प्रदेश में अपने-अपने गुट हैं और लोकसभा में भी वही गुटबंदी हावी रहने की प्रबल संभावनाएं हैं। इसी बीच कांग्रेस ने घोषणा की है कि 18 से 24 जनवरी तक संभागीय मुख्यालयों में कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे। ऐसा कहा जा रहा है कि कांग्रेस ने प्रदेश की 29 सीटों में से ऐसी 11 सीटों पर फोकस किया है जहां 2019 के चुनावों में बीजेपी को 20 प्रतिशत से कम मतों से जीत मिली है। वहीं कांग्रेस के सामने मात्र 35 हजार वोटों से जीतने वाली छिंदवाड़ा सीट को भी बचाने की बड़ी चुनौती है।
सीट -बीजेपी की जीत का मार्जिन
भिंड -20.8 प्रतिशत
धार -11 प्रतिशत
गुना -10.7 प्रतिशत
ग्वालियर -12.3 प्रतिशत
खंडवा -18.6 प्रतिशत
खरगोन -14.2 प्रतिशत
मंडला -6.4 प्रतिशत
मुरैना -10 प्रतिशत
रतलाम -6.5 प्रतिशत
सतना -20.8 प्रतिशत
भाजपाईयों खुश, कांग्रेसी कन्फ्यूज्ड-
अयोध्या में 22 जनवरी को आयोजित भगवान श्रीराम के प्राण-प्रतिष्ठा समारोह की धूम पूरे देश के साथ प्रदेश में भी है। ये आयोजन धार्मिक और सामाजिक होने के साथ कई कारणों से राजनीतिक भी है इसलिए इसे सियासी चश्मे से भी देखा जा रहा है। एक तरफ हैं भाजपा नेता, जो श्रीराम की प्राण-प्रतिष्ठा आयोजन से अपनी प्रतिष्ठा चमकाने में लगे हुये हैं। पूरे शहर में आयोजनों की लंबी श्रृंखला है। दूसरी तरफ कांग्रेसजन हैं, जो गहन असमंजस में हैं। हालाकि, राष्ट्रीय स्तर पर सोनिया गांधी एवं मल्लिकार्जुन खड़गे के इस आयोजन में शामिल होने से इंकार करने का असर भी कांग्रेस में दिखाई दे रहा है।
चुनाव पर असर पड़ेगा या नहीं -
22 जनवरी को जबलपुर में भगवान श्रीराम पर आधारित कार्यक्रमों के आयोजनों का असर लोकसभा चुनाव पर पड़ेगा। जानकारों की माने तो आयोजनों का सीधा असर चुनाव पर पड़ेगा, क्योंकि अयोध्या का कार्यक्रम देशव्यापी असर पैदा करने वाला होगा। वहीं, एक वर्ग ऐसा भी है, जिसका अनुमान है कि चुनाव में असर तो हो सकता है, लेकिन चुनाव आते-आते कई और मुद्दे प्रभावी हो जाएंगे।
कांग्रेस की सर्वे टीम एक्टिव-
कांग्रेस की ओर से लोकसभा प्रत्याशी किसे बनाया जाना चाहिए, इस प्रश्न का उत्तर जानने के लिए पार्टी की ओर से एक सर्वे टीम शहर में एक्टिव हो चुकी है। पार्टी की योजना है कि एक के बाद एक तीन सर्वे होंगे और इन तीनों सर्वे के लब्बोलुआब से तय किया जाएगा कांगे्रस का चेहरा कौन होगा। विधानसभा चुनाव में करारी शिकस्त के बाद कांग्रेस एक बार फिर से मजबूती के साथ लोकसभा चुनाव में उतरने की तैयारी कर रही है। पार्टी ने ऐलान किया है कि 29 फरवरी तक पूरे मप्र के प्रत्याशियों की घोषणा की जाएगी यानी इस तारीख से पहले ही सभी सर्वे पूरे कराने होंगे।
किस स्तर पर होंगे सर्वे-
पार्टी ने तय किया है कि लोकसभा चुनाव के लिए प्रत्याशी का चयन तीन स्तर पर सर्वे कराकर किया जाएगा। इसमें नाम आने पर ही टिकट के लिए संबंधित के नाम पर विचार होगा। एक सर्वे अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी करा रही है तो दो सर्वे प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा कराए जा रहे हैं। इसमें एक सर्वे लोकसभा समन्वयकों का होगा तो दूसरा प्रभारी द्वारा किया जाएगा। 31 जनवरी तक यह कार्य पूरा करके अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी को रिपोर्ट दी जाएगी, जिसके आधार पर प्रत्याशी चयन होगा। इसके अतिरिक्त पार्टी ने 29 लोकसभा क्षेत्र के लिए समन्वयक नियुक्त किए हैं। ये संबंधित क्षेत्र के पार्टी पदाधिकारियों, विधायक, पूर्व विधायक, जिला पंचायत के अध्यक्ष समेत मोर्चा-संगठनों के पदाधिकारियों से चर्चा करके दावेदारों में से एक नाम पर सहमति बनाने का प्रयास करेंगे। वहीं, लोकसभा प्रभारी भी अपने स्तर पर सर्वे करके नाम प्रस्तावित करेंगे। इन सर्वे में नाम आने पर ही टिकट के लिए विचार होगा।

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