कोई यूं ही नहीं बनता मर्यादा पुरुषोत्तम:मौलाना चतुर्वेदी - दा त्रिकाल

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Monday, January 22, 2024

कोई यूं ही नहीं बनता मर्यादा पुरुषोत्तम:मौलाना चतुर्वेदी


कोई यूं ही मर्यादा पुरुषोत्तम नहीं बन जाता है। अपनी सौतेली मां को दिए पिता के वचन को निभाने के लिये श्रीराम ने ऐश-ओ-आराम की जिंदगी छोड़कर तकलीफों से भरी जिंदगी बिताने को बेझिझक 14 साल के वनवास को अपना लिया। उन्होंने पैगाम दे दिया कि दुनिया में मां-बाप से बढ़कर दूसरा कोई नहीं होता। हमें श्रीराम से मां-बाप की आज्ञा का पालन करना सीखना चाहिए। ये कहते-कहते वेद, पुराण और कुरान की आयतों की समानता के जरिये मोहब्बत का पैगाम देने वाले मौलाना वहीदुल्लाह अंसारी चतुर्वेदी भावुक हो गए।

मौलाना वहीदुल्लाह अंसारी चतुर्वेदी ने 1980 में वेद पढ़ना शुरू किया। चारों वेंदों का पूर्ण ज्ञान होने पर उन्हें चतुर्वेदी नाम दिया गया। वो वेद, पुराण और कुरान की समानता पर आधारित कार्यक्रम करते हैं। उन्होंने सऊदी अरब में भी इस तरह के कार्यक्रम किए हैं। उन्होंने पंडित बृज नारायण चकबस्त की रामायण की उन पंक्तियों से अपनी बात को आगे बढ़ाया, जब वनवास जाने से पहले श्रीराम अंतिम बार अपने माता-पिता से मिलने पहुंचे थे। उन्होंने रुखसत हुआ वो बाप से लेकर खुदा का नाम, राहे वफा की मंजिलें-अव्वल हुई तमाम...। उन्होंने कहा कि सभी धार्मिक किताबें मोहब्बत का पैगाम देती हैं लेकिन धर्म के ठेकेदारों ने धर्म में मिलावट कर लोगों को गुमराह किया है।

-चारों वेदों और 18 पुराणों के जानकार हैं चतुर्वेदी-
मौलाना वहीदुल्लाह अंसारी चतुर्वेदी अपने नाम में छिपे राज के बारे में कहते हैं कि वर्ष 1980 से वेद पढ़ना शुरू किया और चारों वेदों का पूर्ण ज्ञान हासिल करने के बाद चाहने वालों ने चतुर्वेदी नाम दे दिया। मौलाना ने चारों वेदों के बाद 18 पुराणों पर भी महारत हासिल की है। विभिन्न लेखकों की रामायण, गीता और बाइबिल का भी ज्ञान अर्जित कर रखा है। उन्हें हिन्दी, उर्दू, अंग्रेजी, अरबी और संस्कृत भाषाओं में महारत है। वेद, पुराण और कुरान में समानताओं का जिक्र करते हुये मौलाना चतुर्वेदी ने कहा कि कल्कि पुराण में कल्कि अवतार के रूप में मुसलमानों के आखिरी नबी मोहम्मद साहब का जिक्र है। उन्होंने कहा कि आदम-हौवा, मनु-शतरूपा, एडम-ईव एक ही है। इसी तरह से अल्लाह की बड़ाई करने वाली अरबी में जहां सात आयत हैं तो वहीं संस्कृत में भी सात श्लोक हैं।

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