याचिकाकर्ता का आरोप, सीबीआई ने नहीं की एमपीएनआरसी से संबद्धता प्राप्त कॉलेजों की जांच
फर्जी नर्सिंग कॉलेज मामले की सुनवाई दो बेंच में हुई। दोनों बेंच ने याचिका पर सुनवाई करने से इंकार कर दिया। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की तरफ से बताया गया कि सीबीआई ने सिर्फ एमपीएमएसयू से संबद्धता प्राप्त कॉलेज का जांच की है। एमपीएनआरसी से संबद्धता प्राप्त कॉलेज की जांच नहीं हुई है। पहली पारी में मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली बेंच में हुई। दूसरी पाली में मामले की सुनवाई जस्टिस शील नागू की अध्यक्षता वाली बेंच के समक्ष हुई। जिस पर न्यायालय ने मामले की सुनवाई रेग्युलर बेंच में किये जाने के निर्देश दिये।गौरतलब है कि याचिकाकर्ता लॉ स्टूडेंट एसोसिएशन की तरफ से दायर याचिका में फर्जी तरीके से नर्सिंग कॉलेज संचालित होने को चुनौती दी गयी थी। याचिका में कहा गया है कि शैक्षणिक सत्र 2020-21 में प्रदेश के आदिवासी बाहुल्य इलाकों में 55 नर्सिंग कॉलेज को मान्यता दी गयी वास्तविकता में यह कॉलेज सिर्फ कागज में संचालित हो रहे हैं। अधिकांश कॉलेज की निर्धारित स्थल में बिल्डिंग तक नहीं है। कुछ कॉलेज सिर्फ चार-पांच कमरों में संचालित हो रहे है। ऐसे कॉलेज में प्रयोगशाला सहित अन्य आवश्यक संरचना नहीं है। बिना छात्रावास ही कॉलेज का संचालन किया जा रहा है। न्यायालय ने पूर्व में प्रदेश के नर्सिंग कॉलेजों की जांच सीबीआई को सौंपी थी। सीबीआई की ओर से मध्य प्रदेश मेडिकल सांइस यूनिवर्सिटी से संबद्धता प्राप्त 308 नर्सिंग कॉलेज की जांच रिपोर्ट बंद लिफाफे में पेश की गयी थी। याचिका पर
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमठ तथा जस्टिस विशाल मिश्रा की युगलपीठ को महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने बताया गया कि सीबीआई की रिपोर्ट के आधार पर फर्जी नर्सिंग कॉलेजों पर कार्यवाही के लिए उच्च स्तर कमेटी गठित की जायेगी। उन्होंने मध्य प्रदेश नर्सिंग रजिस्ट्रेशन काउंसलिंग के संबद्धता प्राप्त कॉलेज के जीएनएम परीक्षा के रिजल्ट घोषित करने की राहत हाईकोर्ट से चाही थी।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता आलोक बागरेचा ने विरोध करते हुए कहा कि सीबीआई ने सिर्फ एमपीएमएसयू से संबंध कॉलेजों की जांच रिपोर्ट पेश की है। एमपीएनआरसी से संबंध नर्सिंग कॉलेजों की जांच सीबीआई ने नहीं की है, जिनकी संख्या लगभग 400 है। इसके अलावा सीबीआई ने उनके द्वारा उठाये गये समस्त बिंदुओं पर जांच की है, इस जानकारी के लिए उन्हें रिपोर्ट पढऩे की अनुमति दी जाये। जस्टिस विशाल मिश्रा ने द्वारा सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। जिसके बाद याचिका को सुनवाई के लिए जस्टिस शील नागू की अध्यक्षता वाली युगलपीठ के समक्ष प्रस्तुत करने के आदेश दिये गये। जस्टिस शील नागू की अध्यक्षता वाली युगलपीठ के समक्ष याचिका की सुनवाई हुई। युगलपीठ के समक्ष दोनों पक्षों ने अपने-अपने तर्क प्रस्तुत किये। युगलपीठ ने याचिका को सुनवाई के लिए रेगुलर बेंच के समक्ष प्रस्तुत करने के आदेश जारी किये हैं।

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