भोपाल गैस त्रासदी पीड़ितों के उपचार और पुनर्वास का मामला, अब 24 जनवरी को होगी सुनवाई
भोपाल गैस त्रासदी के पीड़ितों के उपचार और पुनर्वास संबंधी आदेश का पालन न होने के मामले में प्रदेश सरकार के एसीएस मोहम्मद सुलेमान सहित राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केन्द्र के अमर कुमार सिन्हा तथा विजय कुमार विश्वकर्मा के अवमानना के आरोपों से घिरे है। जस्टिस शील नागू व जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ के समक्ष बुधवार को हुई उक्त मामले की सुनवाई दौरान बताया गया कि अवमानना का दोषी करार दिये जाने के आदेश के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर की गई है, जिसकी सुनवाई 19 जनवरी को होना है। उक्त जवाब के बाद न्यायालयने मामले की अगली सुनवाई 24 जनवरी को निर्धारित की है।
उल्लेखनीय है कि सर्वोच्च न्यायालय ने 2012 में भोपाल गैस पीड़ित महिला उद्योग संगठन सहित अन्य की याचिका की सुनवाई की थी। गैस पीड़ितों के उपचार और पुनर्वास के संबंध में 20 आवश्यक दिशा-निर्देश दिए थे। इनका क्रियान्वयन सुनिश्चित कर मॉनिटरिंग कमेटी गठित करने के आदेश दिए थे। इस कमेटी को हर तीन माह में अपनी रिपोर्ट हाईकोर्ट के सामने पेश करने को कहा था। साथ ही रिपोर्ट के आधार पर केंद्र और राज्य सरकारों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जाने थे। मॉनिटरिंग कमेटी की अनुशंसाओं पर कोई काम नहीं होने का आरोप लगाते हुए अवमानना याचिका दाखिल की गई थी। जिस पर सरकारी अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने कोर्ट के आदेश की अवहेलना की है। इस मामले में अतिरिक्त मुख्य सचिव मोहम्मद सुलेमान और राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र के दो अधिकारी अवमानना के आरोप में घिरे हैं। जिनसे जवाब तलब किया गया था। इसके साथ ही युगलपीठ ने पूर्व में याचिका में बनाए गए अन्य अनावेदक सचिव स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के केंद्रीय सचिव राजेश भूषण, रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय की केन्द्रीय सचिव एमएस आरती आहूजा, प्रदेश सरकार के तत्कालीन मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैस, भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के वरिष्ठ उप महानिदेशक आर कृष्णन, भोपाल मेमोरियल हॉस्पिटल एवं रिसर्च सेंटर के निदेशक डॉ. प्रभा देसिकन तथा डॉ. राज नारायण तिवारी के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही के निर्देश रजिस्ट्री को जारी किये थे।
हाईकोर्ट ने सभी मुद्दों पर मांगी रिपोर्ट-
मामले में बुधवार को सुनवाई दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर डॉ. डीसी अग्रवाल को मॉनिटरिंग कमेटी तथा राज्य सरकार के बीच कॉर्डिनेटर नियुक्त किया था। डॉ अग्रवाल का कार्यकाल बढ़ाने के संबंध में मॉनिटरिंग कमेटी ने राज्य सरकार से अनुशंसा की थी। राज्य सरकार ने मॉनिटरिंग कमेटी की सिफारिश नहीं मांगी है। इसके अलावा मॉनिटरिंग कमेटी द्वारा अधिवक्ता नियुक्त किये जाने पर भी राज्य सरकार ने आपत्ति व्यक्त करते हुए अध्यक्ष को पत्र लिखा था। इसके अलावा कैंसर की बीमारी से ग्रसित गैस पीड़ितों का मुफ्त इलाज नहीं होने का मामला भी युगलपीठ के समक्ष उठाया गया। पीड़िता सपना चौरसिया व्यक्गित रूप से युगलपीठ के समक्ष उपस्थिति हुई और बताया कि वह पिछले एक साल में इलाज के लिए तीन लाख रूपये व्यय कर चूकी है। न्यायालय के आदेश पर भी उन्हें मुफ्त इलाज नहीं मिल रहा है। युगलपीठ ने भोपाल गैस राहत विभाग तथा केन्द्र सरकार को इस मामले को तुरंत सुलझने के निर्देश दिये है। वहीं सरकार की सरकार की ओर से बताया गया कि मॉनिटरिंग कमेटी को सरकारी अधिवक्ता उपलब्ध करवाने के संबंध में सिर्फ सुझाव दिया था। युगलपीठ ने सरकार को सभी मामले में रिपोर्ट पेश करने के आदेश जारी करते हुए अगली सुनवाई 24 जनवरी को निर्धारित की है। सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्त नमन नागरथ, अधिवक्ता राजेश चंद्र, मॉनिटरिंग कमेटी की ओर से अधिवक्ता अंशुमान सिंह हाजिर हुए।

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