अफसरों को आईपीएस अवार्ड क्यों नहीं दे रहे - दा त्रिकाल

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Thursday, January 25, 2024

अफसरों को आईपीएस अवार्ड क्यों नहीं दे रहे

कैट ने कैडर रिव्यू पर केन्द्र सरकार से मांगा जवाब

केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) की जबलपुर बैंच ने एमपी पुलिस ऑफिसर्स एसोसिएशन की याचिका पर अहम आदेश सुनाया है। कैट ने पुलिस अधिकारियों के कैडर रिव्यू में हो रही देरी पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। कैट ने केंद्र सरकार से पूछा है कि एमपी में पुलिस अधिकारियों के कैडर रिव्यू में देरी क्यों हो रही है और क्यों न वो विशेष कैडर रिव्यू के ऑर्डर दे दें। कैट में ये याचिका एमपी पुलिस ऑफिसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष और इंदौर के साइबर क्राइम एसपी जितेंद्र सिंह ने दायर की है। इसमें कहा गया है कि एमपी-पीएससी के जरिए भर्ती हुए पुलिस अधिकारियों का कैडर हर 5 साल में रिव्यू किया जाता है, लेकिन केंद्र सरकार द्वारा कैडर तय करने में देरी की जा रही है। कैट को याचिका में बताया गया कि अधिकांश पुलिस अधिकारियों को आईपीएस अवॉर्ड नहीं हो पाता और वो ज्यादा से ज्यादा एडीशनल एसपी रैंक तक पहुंचकर रिटायर हो जाते हैं।

-बस दो प्रमोशन
दरअसल, राज्य सरकार में राज्य लोक सेवा आयोग से भर्ती हुए एसपी रैंक के अधिकारियों को केवल दो ही प्रमोशन मिल पाते हैं। ज्यादा से ज्यादा एडिशनल एसपी होकर रिटायर हो जाते हैं, जबकि कुछ को अनुभव के आधार पर आईपीएस में शामिल किया जाता है, लेकिन इसके लिए राज्य सरकार की ओर से केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजना पड़ता है। इस याचिका में इस बात का जिक्र किया गया है कि राज्य सरकार केवल क्रमोन्नति दे रही है, जबकि जो लोग आईपीएस होने के हकदार हैं, उन्हें पदोन्नति नहीं मिल रही है। एक सवाल यह भी है कि मध्यप्रदेश में यदि राज्य सरकार सीएसपी को आईपीएस के लिए प्रमोशन दिलवा भी दे तो उन्हें नियुक्ति कहां दी जाए, क्योंकि राज्य सरकार में इतने पद ही नहीं हैं। कैडर संख्या कम होने से आईपीएस अवॉर्ड होने स्थिति क्षीण होती जा रही है। एएसपी के पद से ही बहुसंख्यक रिटायर हो जाएंगे, जबकि इस मामले में दूसरे राज्य मध्य प्रदेश से कहीं आगे हैं और वहां पर आसानी से पुलिस अधिकारियों को आईपीएस बनाया जा रहा है।

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