विवेक पटेल बने उपाध्यक्ष
जबलपुर।जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में भारतीय जनता पार्टी समर्थित उम्मीदवार के सामने कांग्रेस उम्मीदवार भी खड़ा नहीं कर सकी। इससे श्रीमती आशा मुकेश गोंटिया को निर्विरोध चुन लिया गया। वैसे तो जिला पंचायत सदस्य के चुनाव गैर दलीय आधार पर होते हैं, लेकिन राजनीतिक दल उम्मीदवार को समर्थन देते हैं।
विदित है कि जिला पंचायत अध्यक्ष संतोष बरकडे को विधायक चुन लिया है। जिसके बाद यह पद रिक्त हो गया था। सोमवार को हुए चुनाव में भाजपा अपने समर्थक को अध्यक्ष बनवाने में सफल रही। कांग्रेस को यह बड़ा झटका है।
एकता के जाने से बदला गणित-
कांग्रेस की टिकट पर सिहोरा विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने वाली जिला पंचायत सदस्य सुश्री एकता ठाकुर ने हारने के बाद भाजपा की सदस्यता ले ली थी। उनके जिला पंचायत अध्यक्ष बनने की अटकलें रहीं। बरगी से विधायक और भाजपा नेता नीरज सिंह की उपस्थिति में भाजपा ने श्रीमती आशा मुकेश गोंटिया को जिला अध्यक्ष बनाने समर्थन दिया था। अब वे निर्विरोध अध्यक्ष चुन ली गई।
कांग्रेस के पास था बहुमत-
विधानसभा चुनाव से पहले 17 सदस्यों वाले जिला पंचायत मैं कांग्रेस 11 सदस्यों का समर्थन होने का दावा कर रही थी। भाजपा के पास मात्र 6 सदस्य ही थे। जुलाई 2022 में हुए चुनाव भी भाजपा संगठन ने कांग्रेस को पटखनी दी थी। 6 सदस्यों का समर्थन होने के बाद भी अपना अध्यक्ष जिता लिया था। कांग्रेस खेमे से क्रास वोटिंग के भी आरोप लगे थे। अध्यक्ष पद के 2 वोट निरस्त भी हुए थे। तब जिला पंचायत उपाध्यक्ष कांग्रेस समर्थित विवेक पटेल जीते थे उनको 9 और भाजपा समर्थित प्रत्याशी को 8 वोट मिले थे।
क्यों नहीं लड़ी कांग्रेस?
सबके मन में यही सवाल है कि कांग्रेस ने अपना समर्थन किसी उम्मीदवार को क्यों नहीं दिया? कहा जा रहा है कि कांग्रेस के पास अब 5 सदस्य ही रह गए हैं। बहुमत न होने के कारण ग्रामीण संगठन ने चुनाव का निर्णय लेने का अधिकार उपाध्यक्ष विवेक पटेल को दे दिया था। कांग्रेस समर्थित 2 आदिवासी सदस्य चुनाव लडने के पक्ष में नहीं थे इसलिए चुनाव में उम्मीदवार ही नहीं उतारा। सूत्र का कहना है सदस्यों को भय था यदि चुनाव हुए तो कहीं सदस्यों के विकास की राशि ही न रोक दी जाए?
कांग्रेस के जिला ग्रामीण अध्यक्ष डॉ नीलेश जैन का कहना है कि सदस्यों को ही निर्णय लेना था उपाध्यक्ष विवेक पटेल को अधिकृत किया था। निर्वाचन कक्ष में बने हालात पर ही उम्मीदवार न लड़ाने का फैसला लिया है यह विकास को देखकर भी लिया गया है।
विदित है कि जिला पंचायत अध्यक्ष संतोष बरकडे को विधायक चुन लिया है। जिसके बाद यह पद रिक्त हो गया था। सोमवार को हुए चुनाव में भाजपा अपने समर्थक को अध्यक्ष बनवाने में सफल रही। कांग्रेस को यह बड़ा झटका है।
एकता के जाने से बदला गणित-
कांग्रेस की टिकट पर सिहोरा विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने वाली जिला पंचायत सदस्य सुश्री एकता ठाकुर ने हारने के बाद भाजपा की सदस्यता ले ली थी। उनके जिला पंचायत अध्यक्ष बनने की अटकलें रहीं। बरगी से विधायक और भाजपा नेता नीरज सिंह की उपस्थिति में भाजपा ने श्रीमती आशा मुकेश गोंटिया को जिला अध्यक्ष बनाने समर्थन दिया था। अब वे निर्विरोध अध्यक्ष चुन ली गई।
कांग्रेस के पास था बहुमत-
विधानसभा चुनाव से पहले 17 सदस्यों वाले जिला पंचायत मैं कांग्रेस 11 सदस्यों का समर्थन होने का दावा कर रही थी। भाजपा के पास मात्र 6 सदस्य ही थे। जुलाई 2022 में हुए चुनाव भी भाजपा संगठन ने कांग्रेस को पटखनी दी थी। 6 सदस्यों का समर्थन होने के बाद भी अपना अध्यक्ष जिता लिया था। कांग्रेस खेमे से क्रास वोटिंग के भी आरोप लगे थे। अध्यक्ष पद के 2 वोट निरस्त भी हुए थे। तब जिला पंचायत उपाध्यक्ष कांग्रेस समर्थित विवेक पटेल जीते थे उनको 9 और भाजपा समर्थित प्रत्याशी को 8 वोट मिले थे।
क्यों नहीं लड़ी कांग्रेस?
सबके मन में यही सवाल है कि कांग्रेस ने अपना समर्थन किसी उम्मीदवार को क्यों नहीं दिया? कहा जा रहा है कि कांग्रेस के पास अब 5 सदस्य ही रह गए हैं। बहुमत न होने के कारण ग्रामीण संगठन ने चुनाव का निर्णय लेने का अधिकार उपाध्यक्ष विवेक पटेल को दे दिया था। कांग्रेस समर्थित 2 आदिवासी सदस्य चुनाव लडने के पक्ष में नहीं थे इसलिए चुनाव में उम्मीदवार ही नहीं उतारा। सूत्र का कहना है सदस्यों को भय था यदि चुनाव हुए तो कहीं सदस्यों के विकास की राशि ही न रोक दी जाए?
कांग्रेस के जिला ग्रामीण अध्यक्ष डॉ नीलेश जैन का कहना है कि सदस्यों को ही निर्णय लेना था उपाध्यक्ष विवेक पटेल को अधिकृत किया था। निर्वाचन कक्ष में बने हालात पर ही उम्मीदवार न लड़ाने का फैसला लिया है यह विकास को देखकर भी लिया गया है।

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