हाईकोर्ट ने कंपनी की अपील की खारिज,कहा...जिम्मेदारी से बच नहीं सकते
एमपी हाईकोर्ट ने कहा फेसबुक मेटा कंपनी अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से आपत्तिजनक कंटेंट हटाने की जिम्मेदारी से बच नहीं सकती। इस टिप्पणी के साथ ही कोर्ट ने कंपनी की अपील खारिज कर दी है। फेसबुक ने कंटेंट हटाने में असमर्थता जाहिर करते हुए राहत की अपील की थी।दरअसल गोटेगांव निवासी रंजीत पटेल जो धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के अनुयायी है, उन्होंने हाईकोर्ट में एक याचिका पर सुनवाई करते हुए फेसबुक को आदेश दिए थे कि वो बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पण्डित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री के खिलाफ़ आपत्तिजनक कंटेंट अपने प्लेटफॉर्म से हटाए। आदेश का पालन करने की बजाय फेसबुक मेटा कंपनी की ओर से कोर्ट में अपील दायर कर दी गई थी, इसमें कहा गया कि फेसबुक एक डिजिटल पोर्टल है जिस पर कंटेंट कंट्रोल करना संभव नहीं है और कंटेंट हटाने की उसकी जिम्मेदारी नहीं है।
-कोर्ट ने कहा, तय हैं जिम्मेदारी
चीफ जस्टिस रवि मलिमठ और जस्टिस विशाल मिश्रा की युगलपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि सुप्रीम कोर्ट भी आपत्तिजनक कंटेंट्स को लेकर सोशल मीडिया कंपनियों की जिम्मेदारी तय कर चुका है,ऐसे में हाईकोर्ट ने फेसबुक को कंटेंट्स के लिए जिम्मेदार मानते हुए उसकी अपील खारिज कर दी है। अब फेसबुक कंपनी को पण्डित धीरेन्द्र शास्त्री के खिलाफ आपत्तिजनक कंटेंट हटाने होंगे। बता दें कि पण्डित धीरेन्द्र शास्त्री के एक शिष्य रंजीत सिंह पटेल ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, इसमें कहा गया था कि फेसबुक सहित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर शास्त्री के खिलाफ अनर्गल बयान वाले कंटेंट वायरल हो रहे हैं जिनसे याचिकाकर्ता की धार्मिक भावनाएं आहत हो रही हैं। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने फेसबुक, गूगल, यूट्यूब को पण्डित शास्त्री पर बयानबाजी के आपत्तिजनक कंटेंट हटाने के निर्देश दिए थे लेकिन फेसबुक कंपनी ने मामले पर हाईकोर्ट में एक अपील दायर कर दी थी। हाईकोर्ट ने फेसबुक को आपत्तिजनक कंटेंट्स के लिए जिम्मेदार मानते हुए उसकी अपील खारिज कर दी है।

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