कांग्रेस को जो सीटें लड़नी हैं वे बता दी गई:सपा - दा त्रिकाल

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Thursday, February 1, 2024

कांग्रेस को जो सीटें लड़नी हैं वे बता दी गई:सपा

इंडिया गठबंधन में सपा-कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे पर मंथन जारी

कांग्रेस और सपा के बीच सीट बंटवारे को लेकर चल रही रार खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। इंडिया गठबंधन में सपा और कांग्रेस के बीच अभी सीटों के बंटवारे को अंतिम रूप नहीं दिया गया है, लेकिन उससे पहले ही सपा ने अपने प्रत्याशी घोषित करने प्रारंभ कर दिए हैं। इससे जहां कांग्रेस के नेता असहज हैं, वहीं सपा सूत्रों का कहना है कि मध्य प्रदेश की घटना से सबक लेकर उनकी पार्टी आगे बढ़ रही है। सपा सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस को जो सीटें दी जानी है, उसकी जानकारी मुकुल वासनिक की अगुवाई में बनी उनकी कमेटी को दे दी गई है। इस पर सवाल वे ही नेता उठा रहे हैं जो न तो कमेटी में है और न ही उन्हें कमेटी ने कोई जानकारी दी है। मध्य प्रदेश चुनाव के दौरान कांग्रेस ने जिस तरह से सपा के साथ व्यवहार किया, वह सबके सामने है। कई राउंड की बातचीत के बाद गठबंधन के तहत सपा को कोई सीट नहीं दी।

-सभी सीटों की तैयारी में कांग्रेस
दूसरी तरफ कांग्रेस ने सभी लोकसभा सीटों पर अपनी तैयारी शुरू कर दी है। बुधवार को प्रदेश प्रभारी व प्रदेश अध्यक्ष ने अलग अलग बैठकों में एक- एक सीट की समीक्षा की। वहां जीतने-हारने की संभावनाओं को टटोला। बैठक के बाद जिला व सीट स्तर पर सोशल मीडिया समन्वयक तैनात करने की बात हुई। इसी के तहत छह फरवरी को 2019 के लोकसभा, 2022 के विधान सभा प्रत्याशियों और पदाधिकारियों का संवाद कार्यक्रम होगा। इस कार्यक्रम में उनसे फीडबैक लिया जाएगा। उत्तर प्रदेश में भारत जोड़ो न्याय यात्रा के सफल संचालन हेतु कांग्रेस महासचिव, प्रभारी अविनाश पांडेय की स्वीकृति से प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने निम्न नेतागणों को संयोजक, सह संयोजक नियुक्त किया है। पीएल पुनिया (पूर्व सांसद) कार्यक्रम के संयोजक और आराधना मिश्रा मोना सह संयोजक बनाई गई हैं।

बाहरी प्रत्याशियों को ज्यादा मौकों से सपा में असंतोष-
सपा ने पहली सूची में कई ऐसे प्रत्याशियों को उतारा है, जो मूल रूप से समाजवादी नहीं हैं। वे बसपा, कांग्रेस या संघ की पृष्ठभूमि से हैं। इन आयातित प्रत्याशियों से पार्टी में अंदरखाने असंतोष है। ऐसे में भितरघात पर काबू पाने के लिए सपा को अभी से रणनीति बनाकर अमल करना होगा। अंबेडकरनगर से बसपा काडर के नेता रहे लालजी वर्मा को टिकट दिया गया है। वह 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले सपा में शामिल हुए और कटेहरी से विधायक बने। यहां से पुराने समाजवादी शंखलाल माझी और राममूर्ति वर्मा को टिकट न मिलने से उनके समर्थकों में नाराजगी बताई जा रही है। हालांकि, सपा नेताओं का तर्क है कि 2022 में अंबेडकरनगर की पांचों विधानसभा सीटें सपा के खाते में आई थीं, जिनमें से चार विधायक बसपा मूल के हैं। इसलिए पार्टी ने लालजी वर्मा पर दांव लगाना बेहतर समझा। एटा से प्रत्याशी देवेश शाक्य 2012 का विधानसभा चुनाव बसपा से लड़े थे। वह जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव मात्र एक मत से हार गए थे। यहां से पिछला लोकसभा चुनाव सपा से लड़े देवेंद्र सिंह यादव फिर टिकट मांग रहे थे। एटा के एक समाजवादी नेता स्वीकार करते हैं कि टिकट कटने से देवेंद्र सिंह के समर्थकों में असंतोष है, पर मुस्लिम व यादव वोटों में शाक्य वोट प्लस होने की उम्मीद में देवेश को उतारा गया है। बांदा-चित्रकूट संसदीय क्षेत्र से सपा प्रत्याशी पूर्व मंत्री शिव शंकर सिंह पटेल राममंदिर आंदोलन से जुड़े रहे हैं। भाजपा से निष्कासित होने पर वह सपा में आए। बांदा की राजनीति के जानकार पत्रकार रशीद कहते हैं कि टिकट के जो दावेदारों में सबसे उपयुक्त चयन शिव शंकर सिंह पटेल का ही है। लेकिन, पुराने समाजवादियों में असंतोष को थामना होगा। इसी तरह से बस्ती से प्रत्याशी बनाए गए रामप्रसाद चौधरी कई बार बसपा से जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं। 2019 में बसपा से निष्कासित होने पर सपा ज्वॉइन की थी। उन्नाव से प्रत्याशी अनु टंडन पहली बार 2009 में कांग्रेस से लोकसभा पहुंची थीं। पिछला चुनाव सपा से लड़ीं, पर हार गई थीं। यहां से भी कई पुराने समाजवादी टिकट की लाइन में थे। 16 की सूची में एक भी ब्राह्मण प्रत्याशी के न होने पर भी सवाल उठ रहे हैं। अयोध्या से पुराने समाजवादी अवधेश प्रसाद को टिकट दिया गया, लेकिन आनंद सेन के अलावा यहां से पूर्व मंत्री पवन पांडे भी दावेदार बताए जा रहे थे।

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