हर दूसरे दिन होगी सुनवाई: मोटर व्हीकल एक्ट परिपालन मामले में हाईकोर्ट का सख्त फरमान - दा त्रिकाल

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Friday, March 1, 2024

हर दूसरे दिन होगी सुनवाई: मोटर व्हीकल एक्ट परिपालन मामले में हाईकोर्ट का सख्त फरमान


मध्य प्रदेश हाइकोर्ट में जनहित याचिका के जरिये मोटर व्हीकल एक्ट का परिपालन निश्चित रूप से प्रदेश में लागू किये जाने की मांग की गई थी। जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से एक्ट के परिपालन के संबंध में कार्यवाही रिपोर्ट पेश की गई। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमठ तथा जस्टिस विशाल मिश्रा की युगलपीठ ने रिपोर्ट पर नाराजगी व्यक्त करते मामले की सुनवाई हर दूसरे दिन करने के आदेश जारी किये हैं। याचिका पर प्रत्येक सोमवार, बुधवार तथा शुक्रवार को सुनवाई होगी।

विधि छात्रा ऐश्वर्या शांडिल्य की तरफ से सड़क दुर्घटना में हुई दो व्यक्तियों की मौत का हवाला देते हुए ग्वालियर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गयी थी। चीफ जस्टिस के निर्देष पर उक्त याचिका सुनवाई के लिए मुख्य पीठ में स्थानांतरित की गयी थी। याचिका में कहा गया था कि दुर्घटना के समय दो पहिया वाहन चालक हेलमेट लगाए होते तो उनकी मौत नहीं होती। अधिकांष सडक दुर्घटनाओं में गंभीर रूप से सिर में चोट आने के कारण दोपहिया वाहन सवारों की मौत होती है।

याचिका में कहा गया था कि सर्वोच्च तथा उच्च न्यायालय ने दोपहिया वाहन चालकों के लिए हेलमेट की अनिर्वायता के संबंध में आदेश जारी किये हैं। मोटर व्हीकल एक्ट में भी हेलमेट लगाकर वाहन चलाने का प्रावधान है। चौपहिया वाहनों के लिए सीट बेल्ट लगाना तथा वाहनों में हाई सिक्योरिटी नम्बर प्लेट लगाना भी आवश्यक है। जिसका प्रदेश में पालन नहीं किया जाता है। मोटर व्हीकल एक्ट में दिये गये प्रावधानों का सख्ती से पालन किया जाये तो सड़क दुर्घटना में मौतों के ग्राफ में कमी आयेगी।

पूर्व में हुई सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने मोटर व्हीकल एक्ट का परिपालन निश्चित तौर पर किया जाने के आदेश जारी किए थे। आदेश का पालन नहीं होने पर युगलपीठ ने सरकार पर 25 हजार रूपये की कॉस्ट लगाई थी। सरकार के आग्रह पर वाहनों में हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट, हेलमेट तथा सीट बेल्ट की अनिर्वायता का सुनिष्चित तौर पर परिपालन के लिए हाईकोर्ट ने 6 माह का समय प्रदान किया था। निर्धारित समय सीमा में आदेश का परिपालन नहीं होने के कारण हाईकोर्ट ने परिवहन आयुक्त तथा एडीजीपी पुलिस मुख्यालय को तलब करते हुए अवमानना के संबंध में उन्हें शोकॉज नोटिस जारी किये थे। दोनों अधिकारियों की तरफ से शोकॉज नोटिस का जवाब पेश किया गया था। जिसे युगलपीठ ने स्वीकार किया था। हाईकोर्ट द्वारा नियुक्त कोर्ट मित्र अधिवक्ता दिनेष उपाध्याय ने बताया कि गुरुवार को सुनवाई के दौरान कार्यवाही रिपोर्ट पेश की गयी। रिपोर्ट पर युगलपीठ ने नाराजगी हाजिर करते हुए हर दूसरे दिन याचिका पर सुनवाई के निर्देश जारी किये है। याचिका पर अगली सुनवाई 4 मार्च को निर्धारित की गयी है।

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