जबलपुर की पूर्व विधानसभा क्षेत्र का सियासी गठित
कांग्रेस के लिए थोड़ी आसान, बीजेपी के लिए बहुत कठिन और एमआईएम के लिए सिर्फ सपना
Written By- मतलूब अंसारीजिले की 8 विधानसभा क्षेत्रों में से पूर्व विधानसभा क्षेत्र में सिसायत ज्यादा उबाल मारती है। पूर्व क्षेत्र का चुनाव हमेशा से ही रोमांचकारी और चर्चित रहा है। इस बार विधानसभा चुनावों में भी ये सीट चर्चा के केन्द्र में है। प्रशासन की नजर में अति संवेदनशील विधानसभा की फेहरिस्त में शामिल इस सीट पर हमेशा कांग्रेस-बीजेपी में सीधी टक्कर देखने मिली है। लेकिन उवैसी की पार्टी एआईएमआईएम ने अपना उम्मीदवार उतारकर चुनाव की रोचकता में इजाफा किया है। कांग्रेस के मुताबिक एमआईएम बीजेपी की बी टीम है। बीजेपी एमआईएम के सहारे सीट को दोबारा अपने कब्जे में करने की जद्दोजहद में जुटी है। इधर कांग्रेस प्रत्याशी अपने 5 साल के कामकाज के सहारे जनता से समर्थन मांग रहे हैं। दूसरी तरफ एमआईएम सिर्फ मुस्लिम वोटों पर फोकस कर जीत का सपना देख रही है।
आगामी 17 नवम्बर को मतदान है। जिसके चलते क्षेत्र में चुनावी हलचलें उफान पर है। रोड शो, आमसभा, बैठक, नुक्कड सभा और जनसम्पर्क के जरिए हर प्रत्याशी हरेक वोट तक पहुंचने की कोशिश में है। बीजेपी से अंचल सोनकर और कांग्रेस से लखन घनघोरिया मैदान में हैं। इन दोनों के बीच पहले भी कई मुकाबले हो चुके हैं। 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के लखन घनघोरिया ने 36 हजार वोटों से जीत हासिल की थी। इसके अलावा पूर्व क्षेत्र से एमआईएम पार्टी ने गजेन्द्र सोनकर गज्जू को अपने प्रत्याशी के तौर पर मैदान में उतारा है।
बीजेपी की राह बेहद कठिन-
पूर्व क्षेत्र से तीन बार विधायक रहे बीजेपी प्रत्याशी अंचल सोनकर इस बार फिर मैदान में है। विधानसभा के 21 वार्डों में से 7 मुस्लिम वार्डों को छोड़कर बीजेपी चुनाव प्रचार कर रही है। मुस्लिम वार्डों में बीजेपी सिर्फ स्थाई सदस्यों और कार्यकर्ताओं के भरोसे है। हालांकि एमआईएम के उम्मीदवार से भी उन्हें बहुत उम्मीदें हैं। लेकिन नगर निगम चुनाव के बाद एमआईएम के पार्षदों की निष्क्रिीयता के चलते बहुत ज्यादा फायदा होने की गुंजाइश नहीं है। जिससे इस चुनाव में भी बीजेपी की राह कठिन नजर आ रही है।
एमआईएम: फिलहाल मुकाबले में नहीं-
पूर्व क्षेत्र में मुस्लिम वोटों की तादाद देख मैदान में उतरने वाली एमआईएम पार्टी फिलहाल मुकाबले में नजर नहीं आ रही है। उवैशी की पार्टी ने आरक्षित सीट होने के नाते गजेन्द्र सोनकर को उम्मीदवार बनाया। पिछले साल नगर निगम चुनाव पूर्व क्षेत्र के दो वार्डों से पार्षद चुनाव जीतने वाली एमआईएम उत्साहित जरूर है। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और बयां कर रही है। एमआईएम पार्षदों का विरोध और जिला कार्यकारिणी में जारी विद्रोह का खामियाजा एमआईएम उम्मीदवार को उठाना पड़ सकता है।
पूर्व का जातिगत समीकरण-
पूर्व विधानसभा क्षेत्र में कई जातियों से ताल्लुक रखने वाले लोग निवास करते है। इस आरक्षित सीट में तकरीबन 55 हजार अनुसूचित जाति के लोग रहते हैं। इनमें खटीक, बंशकार, जाट, राजपूत बाहुल्य स्थिति में है। इसके अलावा इस विधानसभा में 90 हजार मुस्लिम वोटर्स है। जो जीत-हार में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। वहीं ऑर्डिनेंस फैक्ट्री से रिटायर्ड कर्मचारियों ने भी इसी विधानसभा में अपने घर बना रखे हैं। इसकी वजह से कई समुदायों के लोग यहां पुरानी कॉलोनियों में बसे हुए हैं। सिंधी समाज के लोगों की कॉलोनी भी इसी क्षेत्र में है।

No comments:
Post a Comment