डेढ़ माह पहले मंडला से वेटरनरी लाया गया था
जबलपुर।
डेढ़ महीने अपने जख्मों से संघर्ष कर रहा तेंदुआ अब धीरे-धीरे अपने पुराने मिजाज में लौट रहा है। वो अपने पीछे के दोनों पैरों में खड़ा होकर अठखेलियां कर रहा है और थोड़ी कूंदाफांदी में भी दिलचस्पी ले रहा है। चिकित्सकों ने बहुत धैर्य और संजीदगी के साथ तेंदुए का इलाज किया, जिसका नतीजा दिख रहा है। मंडला जिले से घायल अवस्था में इलाज के लिए जबलपुर वेटरनरी सेंटर लाए गए तेंदुए के स्वास्थ्य में अब सुधार होने लगा है। हालांकि एक दो घाव अभी भरना शेष है। ऐसी संभावना व्यक्त की जा रही है कि दीपावली तक तेंदुए को वन विभाग को सुपुर्द कर दिया जाएगा।
-जख्मों में पड़ गये थे कीड़े
गौरतलब है कि मंडला जिले के बम्हनी से करीब डेढ़ माह पूर्व बुरी तरह घायल अवस्था में एक तेंदुए को जबलपुर वेटरनरी एक्सपर्ट के पास लाया गया था। तेदुएं के शरीर में जगह-जगह इंफेक्शन हो गया था तो वहीं घावों में कीड़े भी लग गए थे। संभावना जताई गई थी आपसी लड़ाई में तेंदुआ बुरी तरह घायल हो गया था। चलने फिरने में असमर्थ हो गया था और घिसट-घिसट के चल रहा था।हालत बेहद ही नाजुक थी लेकिन चिकित्सकों ने हार नहीं मानी। तेंदुए की विभिन्न तरीकों से इलाज किया गया। जिसका धीरे-धीरे असर भी सामने आया अब तेंदुआ चलने के साथ ही पिछले पैरों पर खुद का वजन साधने लायक बन गया है। छोटे पिंजड़े से निकालकर उसे बड़ी जगह में रखा गया है। स्वास्थ्य में होते सुधार पर वीयू के चिकित्सकों ने भी संतोष व्यक्त किया है।
-जख्मों में पड़ गये थे कीड़े
गौरतलब है कि मंडला जिले के बम्हनी से करीब डेढ़ माह पूर्व बुरी तरह घायल अवस्था में एक तेंदुए को जबलपुर वेटरनरी एक्सपर्ट के पास लाया गया था। तेदुएं के शरीर में जगह-जगह इंफेक्शन हो गया था तो वहीं घावों में कीड़े भी लग गए थे। संभावना जताई गई थी आपसी लड़ाई में तेंदुआ बुरी तरह घायल हो गया था। चलने फिरने में असमर्थ हो गया था और घिसट-घिसट के चल रहा था।हालत बेहद ही नाजुक थी लेकिन चिकित्सकों ने हार नहीं मानी। तेंदुए की विभिन्न तरीकों से इलाज किया गया। जिसका धीरे-धीरे असर भी सामने आया अब तेंदुआ चलने के साथ ही पिछले पैरों पर खुद का वजन साधने लायक बन गया है। छोटे पिंजड़े से निकालकर उसे बड़ी जगह में रखा गया है। स्वास्थ्य में होते सुधार पर वीयू के चिकित्सकों ने भी संतोष व्यक्त किया है।

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