हाथी को पाने पहुंचे कोर्ट की शरण में, सीजे की डिवीजन बैंच ने जारी किए नोटिस, अगली सुनवाई चार हफ्ते बाद
दो महावतों ने अपना हाथी पाने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि मलिमठ और जस्टिस विशाल मिश्रा की डिवीजन बैंच ने मामले पर सुनवाई करते हुए मध्यप्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के वन विभाग के अधिकारियों को नोटिस जारी करते हुए जवाब तलब किया है। अब इस मामले की सुनवाई चार सप्ताह के बाद होगी। हाईकोर्ट में हाथी के लिए यह याचिका छतरपुर के दो महावतों ने लगाई है।
छतरपुर के रूप सिंह परिहार और जगदीश दास गिरी है। इनका पुश्तैनी काम हाथी पालने का रहा है। इन्हें दिल्ली के हाजी गौर खान ने दान में एक नर हाथी लिया था, जिसका दान पत्र भी है। वन्य प्राणी अधिनियम की धारा 40-ए के तहत मुख्य वन्य प्राणी अभिरक्षक एवं प्रधान वन संरक्षक भोपाल ने जगदीश दास गिरी और रूप सिंह परिहार को हाथी को पालने की अनुमति दी थी। इसलिए यह लोग हाथी को अपने पास रखे हुए थे। हाथी किस हालत में है इसकी समय-समय पर जांच होती थी। हाथी की लोकेशन के लिए चिप भी उसके शरीर में लगाई गई है। बीते दिनों दोनों महावत मकना नामक हाथी को लेकर राजस्थान के झालावाड़ गए थे। जहां जैन समाज का धार्मिक आयोजन हो रहा था। हाथी के ऊपर बैठकर सवारी निकाली जानी थी। इसी दौरान राजस्थान वन विभाग ने हाथी को पकड़कर उसे उत्तर प्रदेश के मथुरा के एक एनजीओ को सौंप दिया, जो कि हाथी संरक्षण एवं पुनर्वास केंद्र के नाम से जाना जाता है। रूप सिंह और जगदीश दास गिरी के हाथ से उनका हाथी छिन गया तो इन्होंने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दायर की और अपना हाथी वापस मांगा। याचिका पर मंगलवार को मध्यप्रदेश हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस की डिवीजन बैंच ने सुनवाई करते हुए राजस्थान सरकार, मध्य प्रदेश सरकार और उत्तर प्रदेश के एनजीओ से जवाब मांगा है। अधिवक्ता रामेश्वर सिंह और विनायक प्रसाद ने हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता का पक्ष रखा।

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