डाक मतपत्रों को लेकर हुई प्रक्रियात्मक त्रुटि, सीईओ ने आयोग को भेजी रिपोर्ट
प्रदेश में मतगणना के पहले चुनाव आयोग बालाघाट कलेक्टर और खंडवा एसपी के विरुद्ध एक्शन ले सकता है। दोनों ही जिलों में डाक मत पत्रों को लेकर प्रशासनिक चूक का मामला सामने आया है और इसमें अधिकारियों की लापरवाही साबित हुई है। खंडवा एसपी के मामले में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी पहले ही रिपोर्ट ले चुका है जबकि बालाघाट कलेक्टर के मामले में आज ही रिपोर्ट भेजी गई है। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी अनुपम राजन ने भी कहा है कि सोमवार को बालाघाट में डाक मत पत्रों की शार्टिंग और खंडवा में पुलिस कर्मियों के वोट डलवाने के मामले में प्रक्रियात्मक त्रुटि की गई है।-क्या चूक हुई है
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार बालाघाट जिला निर्वाचन अधिकारी और कलेक्टर गिरीश कुमार मिश्रा के स्तर पर इस मामले में जो चूक होना बताई जा रही है वह यह है कि मिश्रा ने रोज जमा होने वाले डाकमतों को तिथिवार और विधानसभा वार एकत्र नहीं कराया था। आयोग के अफसरों का कहना है कि वास्तव में जिला निर्वाचन अधिकारी को ऐसी व्यवस्था करानी थी ताकि इस तरह से स्ट्रांग रूम खोलकर अलग से काम कराने की जरूरत नहीं पड़ती। इसके अलावा अपर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी राजेश कुमार कौल के द्वारा डाक मतों की गणना को लेकर जो निर्देश जारी किेए गए थे उसमें साफ कहा गया है कि कोषालय और रिटर्निंग अधिकारी मुख्यालय पर रखे गए पोस्टल बैलेट पेपर मतगणना स्थल पर तैयार किए गए पोस्टल बैलेट स्ट्रांग रूम में 2 दिसम्बर 2023 को दोपहर बाद तीन बजे के बाद स्थानांतरित किए जाएंगे ताकि इस अवधि तक प्राप्त होने वाले डाक मत पत्रों (जिसमें ईटीपीबी, स्पेशल वोटर, प्रिवेंटिवव डिटेंशन वोटर) को मतगणना स्थल पर पहुंचाया जा सके। इसमें यह भी कहा गया है कि जहां अभी पोस्टल बैलेट रखे हैं वहां एक से अधिक विधानसभा क्षेत्रों के पोस्टल बैलेट सील्ड बंद बक्से में रखे जा सकते हैं। सभी बक्सों पर विधानसभा क्षेत्र का नाम व क्रमांक अनिवार्य रूप से लिखना है। यही काम कलेक्टर को कराना था और विधानसभा वार बैलेट पेपर रखवाने थे जो बालाघाट में नहीं किए गए थे।
-पुलिसकर्मियों के वोट अमान्य -राजन
इस पूरे मामले में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी अनुपम राजन ने कहा कि बालाघाट में कोषालय में डाक मतों को लेकर जो वीडियो सामने आया है, उस मामले की पूरी रिपोर्ट चुनाव आयोग को भेजी गई है। वायरल वीडियो के घटनाक्रम से जुड़े नोडल अधिकारी और कलेक्टर पर कांग्रेस के आरोप पर राजन ने कहा कि संभाग आयुक्त की रिपोर्ट आयोग को भेजी गई है। उन्होंने माना कि प्रकियात्मक त्रुटि हुई है और इसी कारण नोडल अधिकारी को निलंबित किया गया है। उन्होंने कहा कि मतपत्र की किसी तरह की गिनती नहीं हुई है, केवल डाक पत्र की विधानसभावार शॉर्टिंग की जा रही थी। राजन ने कहा कि सोमवार को 3 बजे के निर्धारित समय से शॉर्टिंग होनी थी लेकिन नोडल अधिकारी ने 1:29 बजे से शॉर्टिंग शुरू कर दी थी और शॉर्टिंग की सूचना भी ठीक तरह से नहीं दी थी। इसीलिए प्रक्रियात्मक त्रुटि के कारण नोडल अधिकारी को हटाया गया है।
-अब कैसे रुकेगी गड़बड़ी
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी राजन ने कहा कि बालाघाट जिले में हुई गफलत के बाद अब यह निर्देश दिए गए हैं कि सभी स्थानों पर रखे मतपत्र की शॉर्टिंग 2 दिसंबर को ही की जाएगी ताकि फिर ऐसे हालात न बनें। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने कहा कि खंडवा जिले में 20 नवम्बर को जिला निर्वाचन अधिकारी की अनुमति बगैर डलवाए गए पोस्टल बैलेट को अमान्य कर दिया गया है। इस दिन 123 पुलिस कर्मियों के पोस्टल बैलेट डलवाए गए थे। इस पूरे मामले की रिपोर्ट चुनाव रिपोर्ट आयोग को भेजी है, आयोग के निर्देश अनुसार इस मामले में मतदान कराने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों पर कार्यवाही होगी।
-खंडवा में क्या गफलत हुई
इधर प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि खंडवा में पुलिस अधीक्षक वीरेंद्र सिंह द्वारा पुलिसकर्मियों के वोट डलवाने का जो काम किया गया वह आयोग की गाइडलाइन के विरुद्ध था। आयोग ने साफ निर्देश दिए थे कि पोस्टल बैलेट से वोट डलवाने का काम मतदान तिथि 17 नवम्बर से एक दिन पहले 16 नवम्बर तक कराया जाना था। इसके बाद इसकी अनुमति नहीं थी। खंडवा एसपी ने आयोग की अनुमति बगैर वोट डलवाए। इसलिए उनकी गलती साफ है। इस मामले में कलेक्टर अनूप कुमार सिंह को भी क्लीन चिट नहीं दी जा सकती क्योंकि एसपी के ऐसा करना पर जिला निर्वाचन अधिकारी के तौर पर उनके द्वारा कार्यवाही नहीं की गई और आयोग को समय पर अवगत नहीं कराया गया।

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