मप्र विधानसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल ने कहा
भोपाल।पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल ने कहा है कि ईवीएम को लेकर जिस तरह से शिकायतें आ रही हैं, और जैसे परिणाम विधानसभा चुनाव में आए हैं उसके बाद तो यही कहा जा सकता है कि विपक्ष को लोकसभा चुनाव नहीं लड़ना चाहिए।? देश के सभी विपक्षी दल जब यह मांग कर रहे हैं कि बैलेट पेपर से चुनाव कराया जाना चाहिए तो केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार यह क्यों नहीं स्वीकार करती है।? एक बार बैलेट से चुनाव कराए जाने के बाद अगर रिजल्ट में बदलाव नहीं होता तो ईवीएम से चुनाव कराया जा सकता है लेकिन इसके पहले सब की मांगों को नकारना उचित नहीं है। सिंह ने मीडिया से चर्चा में कहा कि प्रदेश कांग्रेस की जो स्थिति हुई है उसके लिए प्रदेश नेतृत्व ही नहीं केंद्रीय नेतृत्व को भी विचार करना चाहिए क्योंकि ऐसा सिर्फ मध्य प्रदेश में नहीं हुआ है बल्कि राजस्थान और छत्तीसगढ़ में भी यह स्थिति है। पूर्व नेता प्रतिपक्ष सिंह ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ के इस्तीफे को लेकर कहा कि यह तो वही बता सकते हैं। मैं जब किसी पद पर नहीं हूं तो किस पद का इस्तीफा दूं। पूर्व नेता प्रतिपक्ष सिंह ने कहा कि काउंटिंग के रिजल्ट आने के पहले तक सब यही कह रहे थे कि कांग्रेस की सरकार बन रही है लेकिन रिजल्ट आने के बाद सब लाड़ली बहना और भगवान राम के मंदिर की बात करने लगे हैं। अगर यह सही है तो काउंटिंग के पहले जो हकीकत बताई जा रही थी वह इतना गलत कैसे हो सकती है। उन्होंने कहा कि खुद बीजेपी के नेता यह नहीं मान रहे थे कि डेढ़ सौ सीट बीजेपी जीत पाएगी लेकिन 164 कहां से आ गई, कुछ तो बात है।
-ऐसी है समीक्षा की योजना
अजय सिंह ने कहा- हार के कारणों की जिला स्तर पर और संभाग स्तर पर समीक्षा करेंगे। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने कल हुई समीक्षा बैठक में जिला स्तर और संभाग स्तर पर हार की वजह तलाशने के लिए समीक्षा करने की बात कही है। इसके अलावा सभी से यह भी पूछा जा रहा है कि आखिर उनके क्षेत्र में उन्हें इतने कम वोट क्यों मिले। इसकी व्यापक समीक्षा प्रदेश कांग्रेस करने जा रही है।
-ऐसी है समीक्षा की योजना
अजय सिंह ने कहा- हार के कारणों की जिला स्तर पर और संभाग स्तर पर समीक्षा करेंगे। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने कल हुई समीक्षा बैठक में जिला स्तर और संभाग स्तर पर हार की वजह तलाशने के लिए समीक्षा करने की बात कही है। इसके अलावा सभी से यह भी पूछा जा रहा है कि आखिर उनके क्षेत्र में उन्हें इतने कम वोट क्यों मिले। इसकी व्यापक समीक्षा प्रदेश कांग्रेस करने जा रही है।

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