ज्योतिषियों ने कहा...महाकाल के आगे कोई प्रधानमंत्री-मुख्यमंत्री नहीं
मध्य प्रदेश के नए मुख्यमंत्री के रूप में डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को पद की शपथ ली। डॉ. मोहन यादव महाकाल की नगरी उज्जैन के रहने वाले हैं। उज्जैन से प्रदेश के मुख्यमंत्री का एक मिथक जुड़ा है। मिथक है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री रात में उज्जैन में नहीं रुक सकते। ये मिथक केवल राज्य के मुख्यमंत्री के साथ नहीं बल्कि प्रधानमंत्री और रियासत के राजा-महाराजाओं से भी जुड़ा है।मान्यता है कि उज्जैन में महाकाल विराजे हैं। ये उनकी नगरी है, इसलिए नगरी में एक ही राजा रह सकता है। वह हैं महाकाल।
डॉ. मोहन यादव उज्जैन के ही रहने वाले हैं तो वे रात में उज्जैन के अपने निजी आवास पर रुक सकेंगे या नहीं? इसे लेकर ज्योतिषाचार्य की अलग-अलग राय है। ज्योतिषाचार्य आनंद शंकर व्यास कहते हैं कि यदि परंपरा है तो उसका पालन करना होगा। वहीं, पंडित विजयशंकर मेहता का कहना है कि यदि राजा मानकर रात गुजारेंगे तो दिक्कत है। आखिर क्या है उज्जैन का मुख्यमंत्री से जुड़ा मिथक? 10 दिसंबर को यानी मुख्यमंत्री की घोषणा से एक दिन पहले डॉ. मोहन यादव ने बाबा महाकाल के दर्शन किए थे। 10 दिसंबर को यानी मुख्यमंत्री की घोषणा से एक दिन पहले डॉ. मोहन यादव ने बाबा महाकाल के दर्शन किए थे।
-क्या है मिथक
महाकाल मंदिर के पुजारियों के मुताबिक बाबा महाकाल की अपनी एक परिधि है। यहां किसी भी राज्य का मुख्यमंत्री या राजघराने से जुड़ा व्यक्ति इस परिधि से दूर रहता है। महाकाल मंदिर पर जो ध्वज लहराता है उसे धर्मध्वजा कहते हैं। इस धर्मध्वजा की जहां तक छाया पड़ती है, उस परिधि तक कोई राजा रात में नहीं रुक सकता। विक्रमादित्य उज्जैन के राजा थे, तब उनका किला इसी परिधि में आता था। कहा जाता है कि जब विक्रमादित्य न्याय करने जाते थे, तब राजा की कुर्सी पर महाकाल विराजित होते थे, इसलिए वे न्याय कर पाते थे। मान्यता के अनुसार विक्रमादित्य के बाद किसी भी राजा को राज करने का अधिकार तभी मिल सकता है, जब वह राजा विक्रमादित्य की तरह पराक्रमी और न्यायप्रिय हो। कुछ लोग मानते हैं कि यही वजह रही कि राजा भोज को अपनी राजधानी धार और भोपाल में बनाना पड़ी थी।
-मोरारजी देसाई को देना पड़ा था इस्तीफा
उज्जैन का वीवीआईपी नेताओं से जुड़ा ये मिथक इसलिए भी कहा जाता है क्योंकि भारत के पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था। मोरारजी देसाई भारत के चौथे प्रधानमंत्री थे। एक रात वे उज्जैन में रुके थे। अगले ही दिन कुछ ऐसे हालात बने कि उनकी सरकार गिर गई। ऐसा ही कुछ कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा के साथ भी जुड़ा है। उज्जैन में रात गुजारना येदियुरप्पा को महंगा पड़ा था क्योंकि 20 दिन बाद वे मुख्यमंत्री नहीं रह सके थे।
-शिवराज ने भी नहीं गुजारी रात
शिवराज सिंह चौहान 18 साल तक प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। इतने सालों में उन्होंने एक रात भी उज्जैन में नहीं गुजारी। ताजा उदाहरण 25 नवंबर का है। शिवराज पूरे परिवार के साथ महाकाल मंदिर पहुंचे थे। यहां उन्होंने महाकाल लोक के दर्शन भी किए और महाकाल की शयन आरती में भी शामिल हुए। रात 11.30 बजे तक शिवराज मंदिर परिसर में ही रहे। रात 12 बजने से पहले वे उज्जैन की सीमा से बाहर निकल गए और उज्जैन की सीमा से बाहर जाकर मीडियाकर्मियों से बात की।

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