गोपनीय जांच रिपोर्ट में खुलासा, नेता-अफसर और वेयरहाउस संचालकों का गिरोह एक्टिव, 40 फीसदी किसानों के पंजीयन फर्जी, किसानों का डाटा बेचकर भी की कमाई
धान घोटाले में भ्रष्टाचार की परतें लगातार उजागर हो रही हैं। राज्य सरकार की एक ताजा जांच रिपोर्ट में धान घोटाले को लेकर नए तथ्य सामने आए हैं। ये जांच खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की गोपनीय टीम ने की है। रिपोर्ट के अनुसार, वेयरहाउस में फर्जी किसानों का पंजीयन किया गया, सिकमीनामा में कायदों को तिलांजलि दी गयी और नेताओं, अफसरों और वेयरहाउस गिरोह के नुमाइंदों ने धान खरीदी को मजाक बनाकर रख दिया। हालाकि, समझ में ये नहीं आ रहा है कि जब रिपोर्ट आ चुकी है तो राज्य सरकार की ओर से कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है,क्योंकि मामला अति गंभीर है। धान खरीदी को पूरा कराने वाला एक भी हाथ ऐसा नहीं है, जिसे बेदाग कहा जा सके। हालांकि जिले के नए कलेक्टर दीपक कुमार सस्केना ने कमान संभालते ही दोषियों पर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है। पाटन में आंदोलनरत किसानों से मिलने की बात कहते हुए कलेक्टर ने बारिश में खराब धान को भी सुखाने और अन्य इंतजाम की बात रही है।
-बिना आवेदन हो गया रजिस्ट्रेशन
सरकार की उच्च स्तरीय जांच कमेटी के अनुसार 40 फीसदी धान खरीदी के पंजीयन फर्जी हंै। 54 हजार किसानों ने पंजीयन कराया था, जिसमें 40 फीसदी किसानों के पंजीयन फर्जी हैं। इस 40 फीसदी में भी 60 फीसदी पंजीयन ऐसे हैं,जिनमें आवेदन ही नहीं किया गया। पूरे मामले में ऑपरेटर और उसके साथ काम करने व अन्य कर्मचारियों ने फर्जी पंजीयन करने का काम किया। ऑपरेटर में भी कई ऐसे हैं, जिनके वेयरहाउस चल रहे हैं धान उपार्जन में बड़े पैमाने पर सिकमीनामा में भी अनियमितताएं पाईं गयी हैं। प्रदेश में जहां महज 4 से 5 प्रतिशत सिकमीनामा हुआ तो वहीं जबलपुर में ये आंकड़ा 25 प्रतिशत से अधिक पहुंच गया।
-स्व-सहायता समूह भी कटघरे में
जांच में पाया गया है कि घोटालेबाजों ने खरीदी में अपनी हिस्सेदारी बनाए रखने के लिए स्व-सहायता समूहों का गठन भी किया,जिसमें उनके लोग ही शामिल हैं। स्व-सहायता समूहों में अधिकांश महिलाओं का नाम सिर्फ डमी के तौर पर किया गया। पंजीयन के दौरान फर्जी किसान, जमीन और धान का डाटा भी बेचा गया। गिरोह से जुड़े कई दस्तावेज भी मिले हैं।
किसानों के साथ न्याय होगा:कलेक्टर
इधर, जबलपुर के नए कलेक्टर दीपक सक्सेना से उम्मीदें बढ़ गयी हैं, क्योंकि वे इससे पूर्व संचालक खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण, प्रबंध संचालक मध्यप्रदेश राज्य भंडार के तौर पर काम कर रहे थे और उन्हें पूरे घोटाले की पूरी जानकारी है। हालाकि, मीडिया से पहली मुलाकात में उन्होंने कहा कि धान घोटाले को उजागर करना और धान खरीदी को पटरी पर लाना उनकी प्राथमिकता है। पद संभालते ही मीडिया से रूबरू होकर कलेक्टर ने कहा कि 36 गोदामों में अनियमित तरीके के धान रखा गया। माल की मिक्सिंग हो चुकी है। एफएक्यू माल की छंटाई हो जाने दीजिए। शासन एफएक्यू माल किसानों से खरीदेगा। जांच जारी है। किसानों से अपील करते हुए कलेक्टर ने कहा कि किसान सहयोग करें।
-घोटालों की कीमत किसान क्यों चुकाए
इधर, भारतीय किसान संघ ने अफसरों के खिलाफ मोर्चा खोलते हुये धरना-प्रदर्शन शुरु कर दिए हैं। शुक्रवार को संघ के कार्यकर्ताओं ने अलग-अलग तहसीलों में विरोध-प्रदर्शन कर सरकार से पूछा कि घोटालेबाजों की करतूत की कीमत आखिर किसान क्यों चुकाएगा। पूरे दिन चले आंदोलन के बाद देर शाम कलेक्टर के आश्वासन के बाद किसान शांत हुये,लेकिन कहा गया है कि यदि जल्दी ही किसानों की धान सही-सलामत वेयरहाउसों तक नहीं पहुंची तो फिर से सड़कों पर उतरेंगे। संघ के प्रचार प्रमुख राघवेंद्र पटैल ने कहा कि किसानों का आग्रह केवल इतना है कि घोटाले की जांच के साथ-साथ वास्तविक किसानों की उपज को विधिवत वेयरहाउस तक पहुंचाने का काम भी जारी रहना चाहिए। आंदोलन में प्रदेश उपाध्यक्ष ओमनारायण पचौरी, जिलाध्यक्ष मोहन तिवारी, उपाध्यक्ष दामोदर पटेल, विवेक बेहुरे, राजकुमार वाजपेई, सुनील पटेल, रामकृष्ण सोनी, गजेंद्र सिंह, वीरेंद्र सिंह, जिला मंत्री धनंजय पटेल, आशीष पटेल, हरिशंकर पटेल अनिल पटेल, रितेश तिवारी, राजेंद्र तिवारी, मनोज दुबे, श्यामसुंदर साहू, रितेश पचौरी, मुकुल पचौरी, मुदित पचौरी, कुंवर पटेल, वीरेंद्र साहू, विनय, मनीष साहू, विनोद नवेरिया, विकास मिश्रा, विश्वनाथ गोंटियां, प्रकाश नारायण पटेल, आशीष पल्हा, बृजेश छिरा आदि की उपस्थिति रही।
कई खरीदी केन्द्रों में धान बर्बाद
जिले के कई खरीदी केन्द्रों के बाहर पड़ी धान बारिश के चलते बर्बाद हो गई है। जिसको लेकर कलेक्टर ने भी खास इंतजाम की बात कही है। लेकिन पाटन इलाके के श्रीराम वेयरहाउस के बाहर खुले में पड़ी हजारों क्विंटल धान किसी काम की नहीं बची। इसके अलावा सभी खरीदी केन्द्रों में इस तरह की अव्यवस्थाएं व्याप्त हैं।




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