सुमित्रा महाजन: कार्यक्रम के दौरान भावुक हुई पूर्व लोकसभा स्पीकर - दा त्रिकाल

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Saturday, January 27, 2024

सुमित्रा महाजन: कार्यक्रम के दौरान भावुक हुई पूर्व लोकसभा स्पीकर

भगवान राम के दर्शन को बयां कर नहीं रोक पाई आंसू

इंदौर में सेवा सुरभि द्वारा आयोजित कार्यक्रम में पूर्व लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन खूब रोईं। अयोध्या राम मंदिर से लौटकर भगवान राम के दर्शन के बारे में अपने अनुभव सुनाते हुए वे रोने लगीं और उन्होंने कहा कि मैं वह अनुभव सुनाते समय खुद पर नियंत्रण नहीं रख सकती। वहां मुझे जो अनुभव हुआ उसे मैं कभी भी भूल नहीं सकती। भगवान राम को देखकर मुझे वहां भी आंसू आ गए थे और आज उस अनुभव को सुनाते वक्त फिर मेरी आंखें नम हो गई हैं।

पूर्व लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने कहा वहां हर बड़ा व्यक्ति भी छोटा था। अयोध्या राम मंदिर में सब व्यक्ति आम नागरिक बनकर गए। बड़े बड़े लोग वहां की व्यवस्था में लगे हुए थे। देखना, अब राम राज्य आएगा। वह दृश्य देखने के लिए मेरी आंखें तरस गईं थीं। वहां पर सभी यह कह रहे थे कि रामलला को जी भरकर देखेंगे, हमने भी तो मंदिर के लिए अपना योगदान दिया है। इतना बड़ा आयोजन हो गया, लेकिन किसी को कोई परेशानी नहीं हुई। अपनी लाठी से एक साधु ने पुलिस वाले की पिटाई की लेकिन पुलिस वाले ने खुशी-खुशी पिटाई खा ली। ताई ने कहा कि जब मैंने रामलला को देखा तो आंखों में आंसू आ गए। पर मैंने जब रामलला की आंखों में देखा तो लगा कि उनकी आंखें भी नम हैं। जैसे वो कह रहे हों कि मैं आ गया। ये अनुभव में कभी नहीं भूलूंगी। ईश्वर के दरबार से मुझे सम्मान मिला और राम मंदिर जाने का न्यौता मिला। पीएम मोदी क्कद्व रूशस्रद्ब ने जब कहा अब हमारे राम आ गए हैं तो सबकी आंखों में आंसू आ गए। राम विजय नहीं विनय हैं।

हम रामराज्य के श्रेष्ठ नागरिक बनें
कृष्ण कुमार अष्ठाना ने कहा मन ही नहीं भर रहा था। शायद पीएम मोदी आध्यात्म की यात्रा से इसलिए वापस आए, क्योंकि उन्हें देश को यह दिखाना था। राम तो आ गए अब राम राज्य लाना है। जिम्मेदार नागरिक बनना है। अब हमें राम राज्य के श्रेष्ठ नागरिक बनना है। राष्ट्र ने बहुत कीमत चुकाई अब राम राज्य लाएं।

भारतीयों को डराने के लिए गिराया गया था राम मंदिर
पूर्व राज्यपाल कोकजे ने कहा राम मंदिर इसलिए गिराया क्योंकि भारतीय लोगों के मन में डर बैठाना था। यह राष्ट्रीय अस्मिता का कार्यक्रम था। बहुत भावुक कार्यक्रम था। उन सभी की यादें ताजा हो गईं जिन्होंने इस आंदोलन में प्राणों की आहुति दी। 92 साल के वकील ने केस लड़ा और 96 साल की उम्र में उन्होंने राम मंदिर बनते देखा। केस लड़ते समय उन्होंने घंटों कोर्ट में पैरवी की लेकिन पूरे समय खड़े रहे और जूते तक नहीं उतारे।

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