आवमानना याचिका पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल ने दिए निदेश
खतरनाक पटाखों से हुए हरदा के हादसे के मद्देनजर शासन को सख्त नीति बनाकर स्टेन्डर्ड आपरेटिंग प्रोसीजर तय करना चाहिए। ऐसा इसलिए ताकि ऐसी घटनाएं पुन: न हों। इन उद्योगों तथा आवासीय क्षेत्रों के बीच 500 से 1000 मीटर का बफर जोन होना चाहिए। एनजीटी के पास पूर्व में जमा किए गए 20 लाख को हरदा हादसे के पीड़ितों पर खर्च किया जाए। इस बाबत पर्यावरण, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, रेवेन्यु तथा शहरी विकास के प्रमुख सचिवों की कमेटी खर्च की जिम्मेदारी लेंगी। इन पर तीन सप्ताह के भीतर एक्शन प्लान बनाकर की गई कार्यवाही की रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।उक्त आदेश जस्टिस शिव कुमार सिंह व एक्सपर्ट मेम्बर डा. अफरोज अहमद ने डॉ. पीजी नाजपांडे तथा रजत भार्गव द्वारा नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल में दायर अवमानना याचिका पर जारी किया है। याचिकाकर्ताओं के एडवोकेट प्रभात यादव ने दलील दी की सुप्रीम कोर्ट ने खतरनाक पटाखों पर अण्डरटेकिंग तथा टेस्टिंग के आदेश दिए थे। यदि इन आदेशों का पालन किया जाता तो आज हरदा का हादसा नहीं होता।
एनजीटी के जस्टिस शिवकुमार सिंग तथा एक्सपर्ट मेम्बर डा. अफरोज अहमद ने इस दलिल पर सहमती जताते हुए यह याचिका हरदा के हादसे पर सुमोटो याचिका के साथ जोड़ी। एनजीटी ने अपने आदेश में हरदा सरीखे हादसों पर पूर्ण नियंत्रण करने हेतु 26 कदमों का विस्तृत विवरण दिया है तथा उन्हें पालन करने के सख्त निर्देश दिए। मामले की अगली सुनवाई छह मार्च को तय की।
उत्सव के नाम पर पटाखों का उपयोग न हो-
जस्टिस शिवकुमार सिंह तथा एक्सपर्ट मेम्बर डा. अफरोज अहमद ने स्पष्ट किया कि समारोह व उत्सव के नाम पर प्रतिबंधित खतरनाक पटाखों की अनुमति नहीं दी जा सकती है। किसी के स्वास्थ के साथ खिलवाड नहीं किया जा सकता है।

No comments:
Post a Comment