हिंदू धर्म के प्रमुख त्यौहार में से एक होली का त्यौहार है । बसंत महीना लगने के बाद से ही होली का इंतजार शुरू हो जाता है । फाल्गुन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा की रात होलिका दहन होता है और इसके अगले ही दिन होली का त्यौहार मनाया जाता है। हिंदू धर्म के मुताबिक होलिका दहन को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना गया है। होली एक धार्मिक, सांस्कृतिक और पारंपरिक त्योहार है। पूरे देश में होली के इस त्यौहार का एक अलग ही उत्साह देखने को मिलता है। होली आपसी प्रेम, भाईचारे और सद्भावना का त्योहार है। इस दिन लोग एक दूसरे को गुलाल लगाते है, अपने-अपने घरों में गुझिया और पकवान बनते हैं, एक दूसरे के घर जाकर रंग-गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं देते हैं।
क्या है तिथि-
फाल्गुन पूर्णिमा तिथि इस साल 24 मार्च को सुबह 09 बजकर 54 मिनट से शुरू होगी। तिथि का समापन अगले दिन 25 मार्च को दोपहर 12 बजकर 29 मिनट पर होगा।
होलिका दहन के लिए शुभ मुहूर्त देर रात 11 बजकर 13 मिनट से लेकर 12 बजकर 27 मिनट तक है। ऐसे में होलिका दहन के लिए कुल 1 घंटे 14 मिनट का समय मिलेगा। होलिका के अगले दिन होली मनाई जाती है, यानि इस साल 25 मार्च को होली है।
होलिका दहन की पूजा विधि-
-होलिका दहन के दिन पूजा करने के लिए सबसे पहले स्नान करना जरूरी है।
-स्नान करने के बाद पूजा करने वाले स्थान पर उत्तर या पूरब दिशा की ओर मुंह करके बैठ जाएं।
-पूजा के लिए गाय के गोबर से होलिका और प्रहलाद की प्रतिमा बनाएं।
-वहीं, पूजा की सामग्री के लिए रोली, फूल, फूलों की माला, कच्चा सूत, गुड़, साबुत हल्दी,.मूंग, बताशे, गुलाल नारियल, 5 से 7 तरह के अनाज और एक लोटे में पानी रख लें।
-इसके बाद इन सभी सामग्री के साथ पूरे विधि-विधान से पूजा करें। मिठाइयां और फल चढ़ाएं।
-होलिका की पूजा के साथ ही भगवान नरसिंह की भी विधि-विधान से पूजा करें और उसके बाद होलिका के चारों ओर सात बार परिक्रमा करें।

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