सांसद प्रत्याशी के ऐलान के बाद जबलपुर के कार्यकर्ताओं में उत्साह
टिकट की घोषणा होने के साथ ही राइट टाउन स्थित उनके निवास समेत उनके गृह ग्राम में उनसे मुलाकात करने वालों का सिलसिला शुरू हो गया । ढोल नगाड़ों और मिठाई के साथ सभी कार्यकर्ताओं ने पार्टी के फैसले का स्वागत किया । पारिवारिक कार्य से अपने गृह ग्राम में मौजूद भाजपा के प्रत्याशी आशीष दुबे को शुभकामनाएं देने का सिलसिला देर शाम से ही शुरू हो गया राइट टाउन स्थित उनके आवास पर परिजनों से भी शुभचिंतकों और पार्टी कार्यकर्ताओं ने मिलकर शुभकामनाएं दी।
आशीष दुबे का सियासी सफर
-आशीष दुबे का राजनीतिक सफर
-1990 से सक्रिय राजनीति में है आशीष
-2000 में भाजपा के ज़िला मंत्री बने
-2007-2010 तक भाजपा युवा मोर्चा के ज़िलाध्यक्ष
-2010-2015 तक भाजपा के ग्रामीण ज़िलाध्यक्ष रहै
-2016-2021 तक प्रदेश कार्यसमिति सदस्य रहे
संयोग: राकेश के बाद आशीष-
चुनावी पंडितों की माने और इतिहास को टटोले तो जिस प्रकार से आशीष दुबे के राजनीतिक जीवन का उदाहरण पेश हुआ है कुछ ऐसी ही तस्वीर 2004 लोकसभा चुनाव के पहले भी थी जहां एक वक्त पाटन से विधानसभा सीट की मांग कर रहे पूर्व सांसद राकेश सिंह को पाटन से टिकट नहीं मिली थी और उन्हें बतौर लोकसभा प्रत्याशी के रूप में पार्टी ने मैदान में उतारा था । राकेश सिंह भी उसे वक्त ग्रामीण जिला अध्यक्ष थे और ग्रामीण राजनीति में सक्रिय थे कुछ ऐसा ही वाक्य 2024 लोकसभा चुनाव को लेकर प्रत्याशी बनाए गए आशीष दुबे के साथ भी हुआ है। आशीष ग्रामीण जिला अध्यक्ष के रूप मे भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं और पाटन विधानसभा सीट से लगातार दो बार प्रबल दावेदार भी थे लेकिन पार्टी ने उन्हें भी संसद का टिकट दिया है।
चर्चाओं में अजय विश्नोई की ट्वीट-
पाटन विधानसभा सीट से विधायक अजय बिश्नोई की एक ट्वीट ने खलबली मचा दी और विपक्ष ने भी इस पोस्ट को जमकर वायरल किया लोकसभा प्रत्याशियों के लिए सूची जारी होते साथ ही आशीष दुबे का नाम सामने आने के बाद अपनी फेसबुक पोस्ट पर पहले तो अजय बिश्नोई ने उन्हें शुभकामनाएं दी लेकिन उस पोस्ट में लिखी हुई कुछ बातों ने इस शुभकामना संदेश को कटघरे में रख दिया और उसके कई मायने निकाले जाने लगे । फिलहाल विधायक अजय बिश्नोई अपने इलाज के लिए शहर से बाहर है लेकिन उनकी पोस्ट सुर्खियों में रही।
चुनावी पंडितों की माने और इतिहास को टटोले तो जिस प्रकार से आशीष दुबे के राजनीतिक जीवन का उदाहरण पेश हुआ है कुछ ऐसी ही तस्वीर 2004 लोकसभा चुनाव के पहले भी थी जहां एक वक्त पाटन से विधानसभा सीट की मांग कर रहे पूर्व सांसद राकेश सिंह को पाटन से टिकट नहीं मिली थी और उन्हें बतौर लोकसभा प्रत्याशी के रूप में पार्टी ने मैदान में उतारा था । राकेश सिंह भी उसे वक्त ग्रामीण जिला अध्यक्ष थे और ग्रामीण राजनीति में सक्रिय थे कुछ ऐसा ही वाक्य 2024 लोकसभा चुनाव को लेकर प्रत्याशी बनाए गए आशीष दुबे के साथ भी हुआ है। आशीष ग्रामीण जिला अध्यक्ष के रूप मे भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं और पाटन विधानसभा सीट से लगातार दो बार प्रबल दावेदार भी थे लेकिन पार्टी ने उन्हें भी संसद का टिकट दिया है।
चर्चाओं में अजय विश्नोई की ट्वीट-
पाटन विधानसभा सीट से विधायक अजय बिश्नोई की एक ट्वीट ने खलबली मचा दी और विपक्ष ने भी इस पोस्ट को जमकर वायरल किया लोकसभा प्रत्याशियों के लिए सूची जारी होते साथ ही आशीष दुबे का नाम सामने आने के बाद अपनी फेसबुक पोस्ट पर पहले तो अजय बिश्नोई ने उन्हें शुभकामनाएं दी लेकिन उस पोस्ट में लिखी हुई कुछ बातों ने इस शुभकामना संदेश को कटघरे में रख दिया और उसके कई मायने निकाले जाने लगे । फिलहाल विधायक अजय बिश्नोई अपने इलाज के लिए शहर से बाहर है लेकिन उनकी पोस्ट सुर्खियों में रही।

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