नोटा को न समझें छोटा - दा त्रिकाल

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Wednesday, November 22, 2023

नोटा को न समझें छोटा


जबलपुर की 8 विधानसभा सीटों के पिछले रिजल्ट में नोटा, पोस्टल वोट के कारण 1 से 22 प्रतिशत तक के अंतर से हुआ था फैसला

जबलपुर जिले के लाखों मतदाताओं वाले विधानसभा क्षेत्रों में नोटा यानी नन ऑफ द अबव (इनमें से कोई नहीं) को कम करके आंकना जल्दीबाजी हो सकती है। साल 2018 के चुनाव में हार-जीत हुई थी 5 सौ 28 से और नोटा आए थे 11 सौ 77। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि नोटा और पोस्टल बैलेट की अहमियत बीते चुनाव में क्या थी और इस बार भी इनकी भूमिका घटी नहीं है। जानकारों का दावा है कि प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला करने में इनकी हिस्सेदारी बड़ी होगी।

विधानसभा चुनाव में भाजपा और कांग्रेस प्रत्याशियों के बीच हार-जीत का अंतर बहुत से गणित साफ कर देता है। जबलपुर में पिछले चुनाव में कोई प्रत्याशी एक प्रतिशत के अंतर से जीता तो कोई 22 प्रतिशत के अंतर से जीत कर आया था। इस बार बढ़े हुए मतदान प्रतिशत ने सबको बैचेन कर दिया है। कोई भी दावे के साथ नही कह पा रहा कि वो जीत का हकदार है। कई अन्य बिंदु भी जीत-हार के बड़े कारण बनते हैं,इनमें नोटा की बटन,कर्मचारी अधिकारी के पोस्टल वोट और निर्दलीय प्रत्याशियों के द्वारा काटे जाने वाले वोट शामिल हैं। पिछली बार चार विधायक कांग्रेस के चार भाजपा के थे। जिले की आठ विधानसभा क्षेत्र में भाजपा और कांग्रेस प्रत्याशियों के बीच ही चुनाव हुआ। सिर्फ एक सीट पनागर में त्रिकोणीय मुकाबला था। 1 प्रतिशत से22 प्रतिशत के अंतर से प्रत्याशी जीते या हारे।

विधानसभा-

पाटन
  • भाजपा वोट मिले 53.96
  • कांग्रेस वोट मिले 39.61
जीत का अंतर 14 प्रतिशत

बरगी विधानसभा
  • भाजपा वोट मिले 50.13 प्रतिशत
  • कांग्रेस वोट मिले 40.00 प्रतिशत
जीत का अंतर 10 प्रतिशत

पूर्व विधानसभा
  • भाजपा वोट मिले 57 प्रतिशत
  • कांग्रेस वोट मिले 35 प्रतिशत
जीत का अंतर 22 प्रतिशत

उत्तर विधानसभा
  • भाजपा वोट मिले 35 प्रतिशत
  • कांग्रेस वोट मिले 34 प्रतिशत
जीत का अंतर 1 प्रतिशत

केंट विधानसभा
  • भाजपा वोट मिले 56 प्रतिशत
  • कांग्रेस वोट मिले 35 प्रतिशत
जीत का अंतर 21 प्रतिशत

पश्चिम विधानसभा
  • भाजपा वोट मिले 53 प्रतिशत
  • कांग्रेस वोट मिले 41 प्रतिशत
जीत का अंतर 12 प्रतिशत

पनागर विधानसभा
  • भाजपा वोट मिले 46प्रतिशत
  • कांग्रेस वोट मिले 22 प्रतिशत
  • निर्दलीय वोट मिले 23 प्रतिशत
जीत का अंतर निर्दलीय + कांग्रेस 45 प्रतिशत

सिहोरा विधानसभा
  • भाजपा वोट मिले 45प्रतिशत
  • कांग्रेस वोट मिले 41प्रतिशत
जीत का अंतर 4 प्रतिशत

लगते हैं मामूली, असर करें गंभीर

पिछले चुनाव में आठों विधानसभा में नोटा ,पोस्टल और निर्दलीय प्रत्याशी के चक्कर में वोट कटे थे। जिसका कई सीट पर असर देखने मिला।

पाटन विधानसभा

कुल 16 प्रत्याशी

  • निर्दलीय 14
  • नोटा 3174
पोस्टल भाजपा +कांग्रेस 576

जीत भाजपा

बरगी विधानसभा

कुल प्रत्याशी 16

  • निर्दलीय 14
  • नोटा 3041
पोस्टल भाजपा+कांग्रेस 464

जीत कांग्रेस


पूर्व विधानसभा

कुल प्रत्याशी 13

  • निर्दलीय 11
  • नोटा 2116
पोस्टल भाजपा कांग्रेस 941

जीत कांग्रेस

उत्तर विधानसभा

कुल प्रत्याशी 25

  • निर्दलीय 23
  • नोटा 1177
पोस्टल भाजपा कांग्रेस 742

जीत कांग्रेस

केंट विधानसभा

कुल प्रत्याशी 15

  • निर्दलीय 13
  • नोटा 2214
पोस्टल भाजपा कांग्रेस 1126

जीत भाजपा

पश्चिम विधानसभा

कुल प्रत्याशी 15

  • निर्दलीय 13
  • नोटा 2592
पोस्टल भाजपा कांग्रेस 1754

जीत कांग्रेस

पनागर विधानसभा

कुल प्रत्याशी 15
  • निर्दलीय 13
  • एक निर्दलीय 42569 वोट
  • नोटा 1775
पोस्टल भाजपा कांग्रेस निर्दलीय 1042

जीत भाजपा

सिहोरा विधानसभा

कुल प्रत्याशी 8

  • निर्दलीय 6
  • नोटा 4612
पोस्टल भाजपा कांग्रेस 597

जीत भाजपा




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