दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण की समस्या पर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को सुनवाई हुई। इस दौरान जस्टिस संजय किशन कौल ने पंजाब, हरियाणा, यूपी और राजस्थान सरकारों को सख्त आदेश दिया कि पराली जलाना तुरंत बंद किया जाए। प्रदूषण को देखते हुए हमारा सब्र खत्म हो रहा है, अगर हमने एक्शन लिया तो हमारा बुलडोजर रुकेगा नहीं।
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को भी निर्देश दिए कि नगर निगम शहर का ठोस कचरा खुले में न जलाए, क्योंकि दिल्ली को हर साल प्रदूषण से जूझने के लिए नहीं छोड़ा जा सकता। जस्टिस कौल ने केंद्र से कहा कि वह किसानों को सब्सिडी देने और दूसरी फसलों की पैदावार के लिए प्रेरित करे, ताकि ठंड से पहले पराली जलाना बंद हो सके।
मामले की सुनवाई जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस सुधांशु धूलिया की बेंच कर रही थी। कोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख 10 नवंबर तय की है। यह फैसला दिल्ली में वायु प्रदूषण के लगातार खतरनाक स्तर को कम करने के लिहाज से अहम है। राजधानी की हवा पिछले 8 दिनों से बेहद खराब है। सोमवार को एयर क्वालिटी इंडेक्स 470 था।
याचिकाकर्ता की वकील अपराजिता सिंह ने कहा कि पंजाब में खेतों की आग पर निगरानी नहीं होती। दिल्ली की हवा बिगाड़ने में पराली जलाने का सबसे बड़ा हाथ है। जिस पर जस्टिस कौल ने पूछा की इसका समाधान क्या है, हम दिल्ली को हर साल इस तरह प्रदूषण से जूझने नहीं दे सकते। जवाब में एडवोकेट गोपाल शंकरनारायणन ने कहा इसके पीछे जो वजह है, उसका सामने आना जाना जरूरी है। यहां समस्या पराली जलाना नहीं, बल्कि उसे जलाने की टाइमिंग है। वह कब जलाई जा रही है। अटॉर्नी जनरल वेंकटरमणी ने कहा केवल 20 से 50 दिन ही साल के आखिर में ऐसे होते हैं, जब ये परेशानी होती है। जिस पर जस्टिस एसके कौल बोले हम चाहते हैं कि इसे रोका जाए। हम नहीं जानते कि आप इसे कैसे करेंगे, लेकिन इसे रोकना आपका काम है। तुरंत एक्शन लें। केंद्र सरकार धान की खेती को खत्म करके अन्य फसलें उगाने पर जोर दें। केंद्र सरकार ध्यान दे कि उसे धान के अलावा अन्य फसलों पर भी रूस्क्क के विकल्प तलाशने चाहिए। इसके लिए बुधवार 8 नवंबर को एक मीटिंग होगी, जिसमें सभी संबंधित लोग शामिल होंगे।
प्रदूषण रोकने क्या कदम उठाए-
31 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान को निर्देश दिया था कि वे एक हफ्ते में बताएं कि उन्होंने वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए क्या किया। कोर्ट ने वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग दिल्ली एनसीआर रीजन की रिपोर्ट देखने के बाद चार्ट के रूप में और डीटेल्ड रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया था। साथ ही दिल्ली हृष्टक्र रीजन के वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग से कहा कि वह प्रदूषण की समस्या शुरू होने की ड्यूरेशन और ्रक्तढ्ढ के साथ खेतों में पराली जलाने की जमीनी स्थिति बताते हुए सारी चीजें चार्ट के रूप में पेश करे।

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