सीबीआई को राज्यों के दखल से बचाने की जरूरत - दा त्रिकाल

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Tuesday, December 12, 2023

सीबीआई को राज्यों के दखल से बचाने की जरूरत

संसदीय कमेटी ने की नए कानून की सिफारिश

कुछ राज्यों के सीबीआई जांच में अपनी मंजूरी वापस लेने के बाद महत्वपूर्ण मामलों में इस केंद्रीय जांच एजेंसी की शक्ति सीमित हो गई है। इसलिए एक संसदीय समिति का कहना है कि इस मामले में एक नए कानून की आवश्यकता है। साथ ही इस केंद्रीय जांच एजेंसी को व्यापक शक्तियां देने के लिए एक नए कानून की आवश्यकता है। नए कानून के तहत सीबीआई को राज्य की मंजूरी और दखलंदाजी की जरूरत नहीं पड़ेगी और वह अपना काम निर्बाध तरीके से कर सकेगी। लेकिन इसी के साथ संसदीय समिति ने कहा कि कुछ रक्षात्मक कदम उठाने की जरूरत भी है ताकि सीबीआई की कार्यप्रणाली का उद्देश्य और निष्पक्षता प्रभावित नहीं हो। राज्य इसे अपने खिलाफ भेदभाव के रूप में नहीं देखें। कार्मिक, सार्वजनिक शिकायतें और कानून व न्याय की संसदीय समिति ने सोमवार को संसद के पटल पर अपनी 135वीं रिपोर्ट पेश कर बताया कि विभिन्न मामलों में नौ राज्य सरकारें अपनी मंजूरी वापस ले चुकी हैं। समिति का कहना है कि मौजूदा कानून के तहत राज्य की पहले से मंजूरी लेना सीबीआई जांच के लिए पहली शर्त है। सीबीआई की कार्यप्रणाली दिल्ली विशेष स्थापना पुलिस (डीएसपीई) अधिनियम के तहत आती है। इस कानून के तहत सीबीआई को जांच से पहले राज्य सरकार की उक्त मामले की जांच के लिए मंजूरी जरूरी होती है। अन्यथा जांच में केंद्रीय जांच ब्यूरो के अधिकार बेहद सीमित हो जाते हैं।

-संगठित अपराध बढ़ते ही जाएंगे
लिहाजा, तटस्थ और ठोस जांच के बगैर राज्यों में भ्रष्टाचार और संगठित अपराध बढ़ते ही जाएंगे। इसलिए पहले की ही तरह डीएसपीई एक्ट, 1946 में संशोधन के बजाय एक नए कानून को लागू करने की सिफारिश की गई है। नए कानून के तहत सीबीआई को अहम मामलों की जांच में राज्यों की मंजूरी और दखलंदाजी की आवश्यकता नहीं पड़नी चाहिए।डीएसपीई अधिनियम की धारा छह के तहत राज्य सरकारों ने विशेष वर्ग के अपराधों के खिलाफ जांच के लिए व्यक्ति विशेष के प्रति सामान्य मंजूरी देनी होती है। लेकिन पूर्व अनुमति के दायरे से बाहर आने वाले मामलों में राज्य में जांच करने के लिए सीबीआई को राज्य सरकार की विशिष्ट मंजूरी लेने की आवश्यकता होती है।

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