रामलला की प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल होने का मामला
कांग्रेस आलाकमान की तरफ से राम मंदिर के उद्घाटन समारोह का न्योता ठुकराने पर भाजपा भड़क गई है। पार्टी ने गुरुवार को आरोप लगाया कि कांग्रेस अब बहिष्कार पार्टी बन गई है। इन्होंने भगवान राम तक को काल्पनिक कहा था, जबकि महात्मा गांधी खुद राम-राज्य की कल्पना करते थे। भाजपा ने आरोप लगाया कि यह कांग्रेस अब गांधी की नहीं नेहरु की बन कर रह गई है। इन्होंने कुछ समय पहले ही कांग्रेस के नेता रहे पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के भारत रत्न सम्मान समारोह तक का बहिष्कार किया था।हमेशा राम जन्मभूमि पर मंदिर का विरोध किया:हरनाथ यादव
भाजपा सांसद हरनाथ सिंह यादव ने निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस ने शुरुआत से ही राम जन्मभूमि पर मंदिर का विरोध किया। उसने रास्ते में रोड़े लगाने का कोई मौका नहीं छोड़ा। उनके पास अपने पाप और अपराधों को धोने का मौका था, लेकिन उन्होंने वो भी गंवा दिया। इस देश के लोग भगवान राम के साथ खड़े हैं। कांग्रेस ही नहीं, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव तो न्योते को स्वीकारने से भी इनकार कर चुके हैं। वे भी अपने पिता की गलतियों का प्रायश्चित कर सकते थे। लेकिन उन्होंने यह मौका गंवा दिया। राम और कृष्ण विरोधी ताकतें इस देश में मजबूत हो रही हैं। ये सभी हिंदू-विरोधी ताकतें हैं।
कांग्रेस के फैसले से आश्चर्य नहीं:केंद्रीय मंत्री
कांग्रेस द्वारा राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के निमंत्रण को अस्वीकार करने पर केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी का शुरू से ही यही रवैया रहा है, यहां तक कि जब पुनर्निर्माण के बाद सोमनाथ मंदिर का उद्घाटन हुआ था, उस समय तत्कालीन राष्ट्रपति ने वहां जाने का फैसला किया था, लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री और कांग्रेस पार्टी ने इस कदम का विरोध किया...उस दिन से कांग्रेस पार्टी तुष्टिकरण के लिए लगातार हिंदू मान्यताओं का विरोध कर रही है। इन 30-40 वर्षों के दौरान जब भी राम मंदिर का मुद्दा आया, या तो उन्होंने इसकी आलोचना की या इसका विरोध किया... इसलिए उनके इस फैसले से मुझे आश्चर्य नहीं हुआ।
भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि कांग्रेस ने इससे पहले पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और अब द्रौपदी मुर्मू जी के संसद में अभिभाषण का बहिष्कार किया। 2004 के बाद 2009 तक कांग्रेस ने कारगिल विजय दिवस का बहिष्कार किया। मई 1998 में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार के नेतृत्व में हुए पोखरण परमाणु परीक्षण के बाद 10 दिन तक कांग्रेस ने कोई बयान नहीं दिया था। भाजपा प्रवक्ता ने आरोप लगाते हुए कहा कि किसी भी अच्छे से अच्छे अनुष्ठान में विघ्न उत्पन्न करके संतोष प्राप्त करने वाली प्रवृत्ति की परिचायक कांग्रेस के साथ पता नहीं कौन सी समस्या है? भारत का इतिहास जब-जब करवट ले रहा होता है, तब-तब वो उस अवसर के साथ खड़े न होकर उसका बहिष्कार करते हैं।
आलाकमान का फैसला निराशाजनक-
रामलला की प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल होने के लिए करोड़ों रामभक्त 22 जनवरी को अयोध्या पहुंचना चाहते हैं। हालांकि, श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट की ओर से कुछ खास लोगों को ही इस दिन के निमंत्रण भेजा गया है। वहीं, निमंत्रण मिलने के मुद्दे पर राजनीति भी खूब हो रही है। बुधवार को कांग्रेस के आलाकमान ने रामलला प्राण प्रतिष्ठा समारोह का निमंत्रण ठुकरा दिया है। सोनिया गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे समेत कई नेताओं ने इस आयोजन में शामिल न होने का फैसला किया है। कांग्रेस के दिग्गज नेताओं को यह फैसले पार्टी के अंदर ही कलह का वजह बन गया है। कई कांग्रेस नेताओं ने टिप्पणी करते हुए कांग्रेस आलाकमान के फैसले पर आपत्ति जताई है। गुजरात कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष अंबरीश डेरे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम हमारे आराध्य देव हैं इसलिए यह स्वाभाविक है कि भारत भर में अनगिनत लोगों की आस्था इस नवनिर्मित मंदिर से वर्षों से जुड़ी हुई है। इससे पहले गुजरात के कांग्रेस विधायक अर्जुन मोढवाडिया ने आलाकमान के फैसले पर आपत्ति जाहिर की है। एक्स पर उन्होंने लिखा कि भगवान श्रीराम आराध्य देव हैं। यह देशवासियों की आस्था और विश्वास का विषय है। कांग्रेस को ऐसे राजनीतिक निर्णय लेने से दूर रहना चाहिए था।

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