मध्य प्रदेश: राममय माहौल में कांग्रेस की बढ़ी मुश्किलें - दा त्रिकाल

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Friday, January 12, 2024

मध्य प्रदेश: राममय माहौल में कांग्रेस की बढ़ी मुश्किलें


कांग्रेस ने पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और दिग्विजय सिंह से मध्य प्रदेश कांग्रेस का नेतृत्व छीनकर भले ही युवा नेताओं की कमान सौंप दी है, लेकिन आने वाले लोकसभा चुनाव में उसकी मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस जहां 96 सीटों से घटकर 66 पर आ गई। वहीं, पिछले लोकसभा चुनाव के परिणाम को देखा जाए तो वह भाजपा से 23 प्रतिशत मतों से पीछे है। 2019 में कांग्रेस को भाजपा से 86 लाख वोट कम मिले थे। अंतर का यह आंकड़ा 2014 में 56 लाख और प्रतिशत में 19.13 था। अब कांग्रेस को भी चिंता सता रही है कि लोकसभा चुनाव तक मप्र का माहौल राममय होने के कारण वह वोटों के अंतर को कैसे पाटेगी। जाहिर है कि मप्र के विधानसभा चुनाव परिणामों को देखें तो कांग्रेस दस लोकसभा क्षेत्रों में बढ़त बनाए हुए है लेकिन वह इसे लोकसभा चुनाव परिणामों में बरकरार रख पाएगी, यह कह पाना मुश्किल है।

-अस्तित्व बचाने के प्रयास में कांग्रेस
पिछले महीने हुए पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में छत्तीसगढ़ और राजस्थान की सत्ता खोने के बाद कांग्रेस ने अपनी डूबती नैया को संभालने के लिए युवा नेताओं को बागडोर सौंपी है। ओबीसी वर्ग के जीतू पटवारी को कमल नाथ के स्थान पर मध्य प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष नियुक्त किया है। वहीं, आदिवासी नेता उमंग सिंघार को मप्र विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनाया गया है। कांग्रेस इन युवा नेताओं के सहारे लोकसभा चुनाव में अपने अस्तित्व को बचाने का प्रयास कर रही है। मप्र में कुल 29 लोकसभा सीट हैं।

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